यहां शिक्षकों को भी पढ़ाया जाए नैतिकता का पाठ

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manishaकेमेस्ट्री की क्लास शुरू होते ही सर एक ही बात रोज दोहराते कि ‘‘मैं उसे अच्छा विद्यार्थी नहीं मानता जो पढ़ाई में अच्छा हो बल्कि उसे अच्छा विद्यार्थी मानता हूं जिसकी आदतें अच्छी हो.‘‘ उनकी क्लास में केमेस्ट्री कम और नैतिक शिक्षा की ज्यादा पढ़ाई होती. खैर यह पढ़ाई थी भी बहुत जरूरी. लेकिन सवाल यह है कि क्या नैतिक शिक्षा सिर्फ छात्रों के लिए होनी चाहिए?

मनीषा गोला, पत्रकार

आज शिक्षकों को भी नैतिक शिक्षा की उतनी ही जरूरत है जितनी कि छात्रों को. सीबीएसई की शारीरिक शिक्षा की एक पाठ्यपुस्तक को लेकर विवाद पैदा हो गया है, जिसमें महिला के शरीर की सबसे अच्छी नाप ‘‘36-24-36’’ बताई गई है.

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सीबीएसई ने इस पर यह कहकर पल्ला झाड़ लिया है कि यह निजी प्रकाशक की किताब है ना कि उसकी अपनी आधिकारिक किताब.

यह निजी प्रकाशक की किताब है भी क्या! इस किताब को लिखने वाला तो अकादमिक क्षेत्र का व्यक्ति ही है.

यहां बात सीबीएसई या निजी प्रकाशक का नहीं है सवाल तो महिलाओं के प्रति दुर्भावना का है. इस किताब में ना केवल महिलाओं के फिगर की बात की गई है बल्कि इसे समझाने के लिए मिस वर्ल्ड या मिस यूनिवर्स जैसी प्रतियोगिताओं का उदाहरण भी दिया गया है.           इसे लिखने वाले की सोच यकीनन महिलाओं के लिए प्रगतिवाद की नहीं होगी.

हमने अपनी सुविधाओं के अनुसार महिलाओं को अपने मानदंडों में फिट कर दिया है. हम उन्हें बस अपने चश्मे से देखना चाहते हैं जिसमें हमें बस उनकी देह दिखती है. जब छात्राओं के माहवारी के धब्बों की जांच करने के लिए एक प्रधानाचार्या उनके कपड़े उतरवा देती है तो शिक्षकों के लिए भी नैतिक शिक्षा जरूरी लगने लगती है.

स्कूलों में बच्चियों के यौन शोषण के मामले आए दिन सुर्खियां बनते है. कभी अकेले तो कभी समूह में छात्राओं के शरीर को नोंचने-निचोड़ने वाले शिक्षक और प्रधान शिक्षको के कुकर्म हमारी गुरु-शिष्य की परंपरा पर कालिख पोतते रहे है.

ऐसे में छात्र और छात्राओ को उनके अधिकार, शिक्षको के अच्छे और बुरे व्यवहार के बारे में सजग और सचेत करना बेहद जरुरी है.

सरकार को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए जिससे समय-समय पर शिक्षकों और अकादमिक क्षेत्र के लोगों को भी उच्च चरित्र निर्माण और नैतिकता का पाठ पढ़ाया जा सकें.

 

नोट: ये लेखक के अपने विचार है.

आपको बता दे दिल्ली पुलिस ने प्रकाशक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है. सीबीएसई ने भी इसपर एक रिव्यू कमिटी का गठन कर दिया है.


 

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