हमारा अर्जुन अखिलेश ना धर्मनिष्ठ और ना कर्तव्यनिष्ठ वो भस्मासुर है – अमर सिंह

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मर सिंह ने टीएनआई से एक खास बातचीत में अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी और उसके नेताओ पर जमकर हमला बोला है. अमर सिंह ने समाजवादी पार्टी के नेताओ पर भ्रष्टाचार करने, दाऊद इब्राहिम से रिश्ता रखने, ग्लैमर का भूखा होने और अखिलेश सरकार के दौरान नए प्रोजेक्ट पर मंजूरी लेने के लिए बड़े अफसर के अभिनेता और अभिनेत्री का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है. अमर सिंह के मुताबिक उन्होने कौरवो का द्रोणाचार्य बनकर गलती की लेकिन अब वो प्रायश्चित करना चाहते है. अमर सिंह ने ये भी कहा है कि वो तीसरी बार समाजवादी पार्टी में जाने की गलती नहीं करेंगे और कुछ लोगो के राज खोलने पर दाऊद और उससे जुड़े लोग उनपर हमला करवा सकते है.

अमर सिंह का कहना है कि, “दाऊद इब्राहिम मुझे निशाना बना सकता है. दाऊद और उसके काले धंधे से जुड़े लोगो के खिलाफ मैं सार्वजनिक टिप्पणी करता रहा हूं. उससे ज्यादा और मै क्या प्रायश्चित, पश्चाताप करुं. मेरी गलती है जो मैं कौरवों का द्रोणाचार्य बना रहा.”

समाजवादी पार्टी और मुलायम परिवार से अपने रिश्तो पर अमर सिंह ने कहा कि, “मैं कौरवो का द्रोणाचार्य था. मैने शिवपाल का अंगूठा काटा. उसको अध्यक्ष पद से हटाया अपने अर्जुन अखिलेश को बढ़ाने के लिए. लेकिन हमारे अर्जुन का राजनैतिक पुसंत्व खत्म हो गया है. कलियुग का द्रोणाचार्य अब प्रायश्चित करना चाहता है. क्या इसको प्रायश्चित का भी अधिकार नहीं है ? अर्जुन ने तो द्रोणाचार्य की हत्या कृष्ण के कहने पर कर दी लेकिन ये द्रोणाचार्य जीवित है, सजग है. हमारा अर्जुन अखिलेश ना धर्मनिष्ठ है और ना ही कर्तव्यनिष्ठ है. राजनीति का गांडीव उसके हाथ से छूट गया है.”

अमर सिंह ने अखिलेश की राजनीतिक समझ पर सवाल उठाते हुए कहा कि, “अखिलेश के जैविक पिता मुलायम सिंह, लालन-पालन के हिसाब से पिता शिवपाल और सर्वविदित है मुझे अंकल कहते थे. सबकुछ उनके लिए किया. लेकिन अखिलेश ऐसा आचरण करेंगे. चुनाव के वक्त लोग गधे को भी बाप कहते है. छोटी-मोटी राजनीति करने वाला भी गधे को भी बाप कहता है पिता कहता है. यहां तो उन्होने अपने सभी बाप को गधा कह दिया. चाहे नरेन्द्र मोदी हो, चाहे मुलायम हो, चाहे अमर सिंह हो या फिर चाहे शिवपाल हों.”

अमर सिंह ने कहा कि, “पुत्रमोह में अनुभव की आंच में तपाए बिना, और बिना उचित प्रशिक्षण के तमाम अनुभवी लोगो को दरकिनार करके मुलायम सिंह ने महादेव बनकर भस्मासुर अपने बेटे अखिलेश को बना डाला.”

अखिलेश के अंहकार और उनकी आत्ममुग्धता को हार की बड़ी वजह बताते हुए अमर सिंह ने कहा कि, “अखिलेश कहते थे..आई एम द ग्रेटेस्ट.. काम बोलता है. मै सबसे बड़ा हूं. सबसे ताकतवर हूं… 4 लंगूरे बगल में दाएं-बाएं मुट्ठी बांधे कहते थे ये जवानी तेरे नाम. अखिलेश भइया तेरे नाम. वे हारते ही अपनी जवानी लेकर भाग गए. अब उन्होने अपनी जवानी बीजेपी के नाम कर दी ताकि बालू का पीडब्ल्यूडी का, सिंचाई का ठेका मिल जाए. मुट्ठीभर लोगो ने ऐसा हाल किया कि घर को आग लग गई घर के चिराग से. अखिलेश का अहंकार और आत्ममुग्धता, रामगोपाल यादव का खलनायकपन समाजवादी पार्टी को सदियो के लिए रसातल में ले जाने का जिम्मेदार है.”

अमर सिंह को इस बात का भी मलाल है कि अखिलेश की तरह उनकी पत्नी डिंपल यादव ने भी उनका लिहाज नहीं किया. अमर सिंह ने कहा कि, “सबसे बड़ी बात है उन्होने अपनी पत्नी को भी निकाल दिया. ये दुखद है कि उन्होने भी राजनीतिक टिप्पणियां की. मेरे जैसे व्यक्ति को कहा कि जब उनका चेहरा टीवी पर आता है तो बंद कर देती हूं. बच्चो को भी नहीं देखने देती हूं. और बस्ती में जाती है तो लड़के उन्हे छेड़ते है तो कहती है कि छेड़ो ना.. छुओ ना… भइया से कह दूंगी. वो उनको बंद कराती.”

अमर सिंह के मुताबिक, “ अखिलेश को बाप की साइकिल चाहिए, उसे कांग्रेस का हाथ भी चाहिए और नतीजे से दो दिन पहले बुआ (मायावती) का हाथी भी चाहिए. चल-चल मेरे हाथी यार..बंद होने जा रही है सत्ता की मोटर कार. ये भी चाहिए. वो भी चाहिए. ये बिगड़े हुए अहंकारी, दम्भी… ये लोकशाही में चुने हुए मुख्यमंत्री का आचरण नहीं है जो सारे बापो को ही गधा बना दें. प्रधानमंत्री तक को गधा कह दिया. आपको चाहिए कि आप शत्रु घटाए लेकिन शत्रु कैसे बनाया जाता है इसमें अखिलेश यादव को महारत है.”

अंकल अमर सिंह और अखिलेश में अलगाव क्यों हुआ? इस पर अमर सिंह ने कहा कि, “लोकशाही की राजशाही में जब जन्म के आधार पर,कर्म के आधार पर नहीं सत्ता का चक्र घूमता है तो हर पीढ़ी अपने पिता के सलाहकारो और निकट के लोगो को अपना शत्रु मानती है. मायावती ने भी चुन-चुन कर कांशीराम के निकट के जीतने लोग थे उन्हे निबटा दिया.”

अमर सिंह ने बताया कि, “उन्होने अखिलेश की पढ़ाई और शादी में सहयोग अपना दायित्व समझकर दिया. उन्होने बताया कि, “छोटे अखिलेश शिवपाल के घऱ में पले-बढ़े. युवा होने पर हमारे संरक्षण में रहे. विवाह कराया, विजनेस पढ़ाने ले गए. अंतर्जातीय विवाह के विरोध में पिताजी थे तब मुझे पता नहीं था कि अखिलेश मुख्यमंत्री बनेंगे. बिना किसी लालच के अपने दायित्व का बोध करते हुए उनके लिए जो कर सकते थे, वो किया.”

अमर सिंह ने आजम खान पर हमला करते हुए कहा कि, “आजम खान जैसे टुच्चे और लुच्चे लोग राष्ट्रवाद को खत्म कर रहे है. जो भारत माता को डायन कहते है, जो कश्मीर को पाकिस्तान का अंग बताते है. बयान देकर शहीदो का अपमान करते है. चोरी और सीनाजोरी करते है. पीएम मोदी को आतंकवादी कहते है. दाऊद इब्राहिम गैंग से जुड़े लोग समाजवादी पार्टी में नेता रहे है क्या मुलायम को नहीं पता? मुंबई बम धमाको में शामिल होने के आरोपी रहे अबु आजमी जैसे लोग सबूतो के अभाव में छूट गए लेकिन वो आज भी समाजवादी पार्टी में है.”

अमर सिंह से जब पूछा गया कि समाजवादी पार्टी में ऐसे लोग जुड़े तो आप अपनी जिम्मेदारी से कैसे बच सकते है? इस पर उन्होने अपनी सफाई में कहा कि, “ये मेरी जिम्मेदारी नहीं है. मै तो 7 साल पार्टी से बाहर रहा. उसी दौरान ये लोग बढ़े-पनपे. मैने पार्टी में आने के लिए कभी याचना नही की. मुझे अर्थी कबूल है लेकिन टिकटार्थी बनना कबूल नहीं है. मुलायम सिंह ने मुझे राज्यसभा के लिए चुना. मैने इन लोगो के खिलाफ आवाज उठाई तो मुझे सामूहिक षड़यंत्र करके पार्टी से बाहर निकाल दिया गया. मुलायम सिंह पार्टी में लाने की तीसरी बार कोशिश कर रहे है. हमारी धार को भोंथरा करने की कोशिश कर रहे है. मेल-मिलाप के बुलावा भी भेजते है. पुत्र मोह वो छोड़ नहीं सकते. धृतराष्ट्र ने दुर्योधन को नहीं छोड़ा. रावण ने मेघनाद को नहीं छोड़ा. और पुत्र रस्सी की जली हुई वो ऐंठन है जिसका नाम है अखिलेश. समय की विद्रूपता और थपेड़ो ने उसे उसकी असली जगह बता दी है. ऐसी जगह जाने से कोई फायदा नहीं जहा अपमान हो. मैं पार्टी में जाने की तीसरी बार गलती नहीं करूंगा”

अमर सिंह ने मांग की है कि, “आजम खान के 5000 करोड़ रुपए से विश्वविद्यालय बनाने की जांच होनी चाहिए. ये 5000 करोड़ रुपए कहां से आए.? जिस जमीन पर बना है वो पाकिस्तान चले गए. वो भारत सरकार की संपदा है. मोदी ने भी कहा कि यूपी में काम नहीं कारनामा बोलता है. कुछ लोगो की सूची उनके पास है. कुछ और लोग भी मदद करेंगे. जनता के पैसे की लूटमपाट, नग्न भ्रष्टाचार, बेईमानी, तुष्टिकरण करके अपराधियो को जो प्रश्रय दिया गया उसकी जांच होनी चाहिए.”

गांव-गवंई के समाजवाद में ग्लैमर का तड़का लाने के सवाल पर अमर सिंह ने कहा कि, “ असल में समाजवादी कुनबा ही ग्लैमर का भूखा है. चम्बल के बीहड़ में भटकने वालो ने ग्लैमर देखा नहीं है. मुझसे पहले फिल्म इंसाफ का तराजू में मशहूर बोल्ड अभिनय करने वाले राज बब्बर आए. उद्योगपति भी हमसे पहले आए. विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णुहरि डालमिया के पुत्र संजय डालमिया को सांसद बनाकर पार्टी का कोषाध्यक्ष बनाया गया. हम 7 साल बाहर रहे तो सैफई महात्सव बंद क्यों नही हो गया.? उसमें स्केल और क्यों बढ़ा दिया गया.? गुजरात का दंगा-दंगा है लेकिन मुजफ्फरनगर का दंगा क्या दंगा नहीं.? क्या कोई खेल-कूद प्रतियोगिता है.? मुजफ्फरनगर के दंगे में क्या मुसलमान नहीं मरे-कटे.? गुजरात के दंगे हो रहे थे तो नरेन्द्र मोदी विद्रूपता से कहीं नृत्य नहीं देख रहे थे. मुजफ्फरनगर में मुसलमान मर रहे थे और सैफई में माधुरी दीक्षित और मलिका सहरावत अंगड़ाई लेकर गा रही थी. जोरा-जोरी चने के खेत में.. भीगे ये होठ मेरे..मत कर इतजार, सारी रात मुझसे करो प्यार..ये सब ऐतिहासिक सत्य है. कटु सत्य है. ग्लैमर की पराकाष्ठा थी कि सलमान खान ठुमक रहे थे. हम अगर ग्लैमर लाए और उससे विसंगतियां आई तो निराकण कर देते. हमें निकाल देते. क्यों नही निकाला.? ग्लैमर के भूखे स्वयं है इन्होने ग्लैमर देखा ही नहीं. चम्बल के बीहड़ो में शुष्क ग्लैमर विहीन जीवन जीने वाले लोग ग्लैमर के रस से बिल्कुल आल्हादित हुए. वो कहते थे तो हम थोड़ा बहुत करवा देते थे. हर हफ्ते किसी बड़े राजनेता के बजाए सिर्फ अभिनेता और अभिनेत्री लेकर नवनीत सहगल अखिलेश जी के यहां जाता था. हर योजना के लिए एक सुंदर–खूबसुरत.. हुश्न वाले तेरा जवाब नहीं..ये चल रहा था वहां. लेकिन एक भी हुश्न वाले उत्तर प्रदेश के चुनाव में नहीं आए. उत्तर प्रदेश के चुनाव में 65 साल की वृध्दा हमारी पुरानी भौजाई जया बच्चन जी वो भी एक दिन के लिए आई… “नो कंफ्यूसन नो मिस्टेक ओनली साइकिल ओनली अखिलेश.” लेकिन बाद में नारा बदल गया “नो कंफ्यूसन नो मिस्टेक, टूट गई साइकिल हार गया अखिलेश” प्रचार के लिए कोई नहीं आया. सिर्फ 65 साल की एक अभिनेत्री (जया बच्चन) ने अखिलेश का प्रचार किया.”

अमर सिंह ने कहा कि, मुलायम सिंह मुझसे स्नेह करते थे, आज भी करते है. मुझे विश्वास था कि मुलायम सिंह सब समझ रहे है. लेकिन समाजवादी पार्टी परिवार की पार्टी है. परिवार के बच्चो के युवा होते ही उनके सांसद और विधायक बनने के लिए राजनैतिक क्षेत्र ढूंढा जाता है. मैं आजम की गाली, अखिलेश की उदंडता, रामगोपाल यादव की ज्यादती नहीं सह सकता. परिवार से बाहर का था इसलिए बाहर कर दिया. राजनीति जब व्यवसाय बन जाती है तो परिवार में ही टकराव हो जाता है इस परिवार के साथ ऐसा ही हुआ है.”

अमर सिंह ने कहा कि, “अखिलेश की हार की वजह उनके भ्रष्ट मंत्री और अफसर बने. नोएडा के सीईओ रमारमण और एक नवनीत सहगल. ये दोनो अधिकारी सपा-बसपा सरकार के भ्रष्टाचार के दो मजबूत खंबे है. ये दोनो अधिकारी मायावती के साथ भी उतने ही महत्वपूर्ण उतने ही ताकतवर थे. विलक्षण लोग है सरकार जाने से 4 दिन पहले एफआईआर कर दी जिससे जांच होने पर कहे हमने एफआईआर कर दी. ऐसे कितने प्रकरण होंगे नोएडा में बच्चे-बच्चे का पता है कि एक संजू नागर नाम के बिल्डर को नोएडा के सीईओ रिपोर्ट करते थे.”

अमर सिंह ने बताया कि, “मिडडे मिल कार्यक्रम मायावती के कार्यकाल में नवीन खंडेलवाल कर रहे थे और उनके कार्यकाल में भी नवीन खंडेलवाल कर रहे है. भ्रष्टाचार के खंभे, वही अधिकारी मायावती के हाथ पांव थे वहीं अखिलेश के भी हाथ-पांव थे. अधिकारी वही थे. व्यापारी वहीं थे. सिर्फ बिल्ला अलग था.”

 

 

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