सत्ता, सियासत, सौदे और साजिश का स्वामी !

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तांत्रिक चंद्रास्वामी का मंगलवार को 69 साल की उम्र में दिल्ली के अपोलो अस्पताल में निधन हो गया. देश-विदेश की राजनीति, गलैमर और व्यापार की बड़ी-बड़ी हस्तियां चन्द्रास्वामी के तंत्र और चमत्कार से प्रभावित होकर कभी उनकी भक्त हुआ करती थी लेकिन अपनी सिध्दी और बुध्दि के तंत्रजाल में लोगो को फंसाने वाले चन्द्रास्वामी जिंदगी के आखिरी सालो में खुद मष्तिष्काघात का शिकार हो गए. चन्द्रास्वामी ने एक गैरहिंदू होते हुए भी देश की तंत्र साधना की परंपरा का डंका जहां पूरी दुनिया में बजाया वहीं सियासत के लिए सौदो और साजिश में शामिल होकर उन्होने तंत्र की ऐसी काली दुनिया रची जिसके अंधेरे मे वो खुद खोते चले गए.

राजीव गांधी की हत्या की साजिश में शामिल होने और दाऊद इब्राहिम से रिश्ता रखने के आरोपो के बाद चन्द्रास्वामी के तंत्र का तिलिष्म ढहना शुरु हो गया. चन्द्रास्वामी को 6 महीने तिहाड़ जेल में रहना पड़ा और जेल के कैदियो ने उनके साथ मारपीट और गालीगलौज कर उनका सारा अहंकार और आभामंडल चकनाचूर कर दिया.

काल और कपाल के साधक रहे चन्द्रास्वामी के स्वास्थ्य और भौतिक शरीर का सच अपोलो अस्पताल ने मंगलवार को एक बयान में बताया. बयान में कहा गया कि, “66 वर्षीय आध्यात्मिक नेता जगदाचार्य चंद्रास्वामी जी कुछ समय से बीमार थे. उन्हें हाल में मस्तिष्काघात पहुंचा था और बाद में विभिन्न अंगों ने काम करना बंद कर दिया. दिन में दो बजकर 56 मिनट पर आज उनकी मौत हो गयी.”

राजस्थान के अलवर जिले के बहरोड़ में एक जैन परिवार में पैदा हुआ नेमिचंद बचपन में अपने पिता के साथ हैदराबाद चला गया. पढ़ाई-लिखाई के बजाए धंधे और कमाई की सोचने वाले चन्द्रास्वामी ने कई छोटे-मोटे धंधो में हाथ आजमाया और दूसरो से कुंडली बंचवाते-बांचते वो सत्तर के दशक में आन्ध्रप्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरसिंह राव के करीब पहुंचने में कामयाब रहा. ब्राह्मण परिवार के पीवी नरसिंह राव को अपने कर्मयोग और राजयोग के जोड़-तोड़ के लिए एक प्रभावशाली कर्मकांडी मिल गया.

संयोग से जब पीवी नरसिंह राव का प्रधानमंत्री बनने से राजयोग सिध्द हो गया तो उनकी श्रध्दा चन्द्रास्वामी के चमत्कार में और बढ़ गई. वो पीएम नरसिंह राव के सुपरसीएम बन गए और सत्ता, सियासत और सेलेब्रेटी सभी एक-एक कर इस तांत्रिक की परिक्रमा करने लगे.

चन्द्रास्वामी ने अपने तंत्र के राजतंत्र से अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन, ब्रिटेन की पीएम मार्गरेट थैचर को चमत्कृत किया तो हथियारों के सौदागर अदनान खाशोगी, दुनिया के सबसे बड़े अमीरो में से एक ब्रूनेई के सुल्तान, फिलिस्तीन मुक्ति संगठन के मुखिया यासिर अराफात, जॉर्डन के किंग हुसैन, मिस्र के हुस्नी मुबारक, श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति जयवर्धन, मॉरीशस के पूर्व राष्ट्रपति शिवसागर रामगुलाम, बहरीन के सुल्तान खलीफा से भी अपने सम्बन्ध साध लिए. हॉलीवुड एक्ट्रेस एलिजाबेथ टेलर और बॉलीवुड के राजेश खन्ना जैसे भी उनके भक्त बने.

देश में नरसिंह राव और चन्द्रशेखर और ब्रिटेन में जब मार्गरेट थैचर को प्रधानमंत्री का पद मिल गया तो उन्हे भी लगा ये चन्द्रास्वामी की विशेष पूजा-पाठ और उनके आशीर्वाद का परिणाम है.

चन्द्रशेखऱ और मार्गरेट थैचर ने तो ये बात खुलेआम स्वीकारी भी थी कि उनके प्रधानमंत्री बनने की बात चन्द्रास्वामी ने वर्षो पहले ही उन्हे बता दी थी.

प्रधानमंत्री बनने से पहले चन्द्रशेखर ने अपनी जिंदगी में कभी कोई पद नहीं लिया था और मार्गरेट थैचर जब पीएम की रेस में दूर-दूर तक नहीं थी तभी चन्द्रास्वामी ने उनके एक दिन प्रधानमंत्री बनने की सटीक भविष्यवाणी कर दी थी.

राजीव गाँधी की हत्या के बाद 1991 में पीवी नरसिम्हा राव भारत के प्रधानमंत्री बन तो गए लेकिन ब्रिटेन के एक गुजराती व्यापारी लखुभाई पाठक ने नरसिंह राव पर चंद्रास्वामी की मदद से उनसे 1 लाख डॉलर ठगने का आरोप लगाकर मुकदमा ठोक दिया. रही-सही कसर चन्द्रास्वामी की राजीव की हत्या की साजिश में नाम उछलने से पूरी हो गई.

1995 में पीवी नरसिंह राव के मंत्रिमंडल में गृह राज्यमंत्री राजेश पायलट ने चंद्रास्वामी के गिरफ्तारी के आदेश देकर उन्हे जिंदगी का सबसे बड़ा सदमा दिया.

जनसत्ता अख़बार को दिए एक साक्षात्कार में जब दाऊद गैंग से जुड़े रहे बबलू श्रीवास्तव ने चन्द्रास्वामी के दाऊद इब्राहिम से रिश्तो का राज खोला तो गृह राज्यमंत्री राजेश पायलट ने सीबीआई को चंद्रास्वामी की गिरफ़्तारी के आदेश दे दिए.

प्रवर्तन निदेशालय ने भी कई नए मुक़दमे दर्ज किए और स्वामी की सरकारी फाइलो में दबी पुरानी कुंडली खोल दी.

अदालत में पेशी के लिए चन्द्रास्वामी को जेबकतरो, चोरो, चाकूबाजो, हत्या और बलात्कार के आरोपियो के साथ जेलवैन में बैठकर आना पड़ता था.

चन्द्रास्वामी अपने दिल्ली के आश्रम में प्रधानमंत्री से भी ऊंचे सिंहासन पर बैठा करते  थे लेकिन जेलवैन के सफर के दौरान अगल-बगल बैठे कैदियो ने कभी उनकी दाढ़ी-बाल खींचकर तो कभी थप्पड़ और गालियो से अपनी श्रध्दा भेंट कर चन्द्रास्वामी का सारा महात्म्य चूर-चूर कर दिया.

अदालतो में वो कभी लंगड़ाकर तो कभी व्हील चेयर पर बैठकर पेश हुए. मुकदमेबाजी के चक्करों में वो उलझते गए और उनके करीबी रहे लोग भी भी उनसे उचटते गए.

बाद में राजेश पायलट की जब राजस्थान में सड़क दुर्घटना में मौत हो गई तो बहुत से लोगो ने इसे भी चन्द्रास्वामी के ‘तंत्र’ का प्रकोप माना.

चन्द्रास्वामी ने दिल्ली में सर्वेंट क्वार्टर से निकलकर सत्ता के सबसे शक्तिशाली लोगो को साधा. 1965 में बिहार के सांसद सिद्धेश्वर प्रसाद के सर्वेंट क्वार्टर में डेरा जमाकर चन्द्रास्वामी ने दिल्ली के राजनेताओ से संपर्क और संबंध की तिगड़मे लगाई. सर्वेंट क्वार्टर में रहने वाला उनका जोड़ीदार चतुर्भुज गौतम बाद में चन्द्रशेखर का निजी सचिव बना और वो खुद चन्द्रशेखर के गुरु बन गए.

चन्द्रास्वामी का नाम कभी दिल्ली में एक स्वतंत्र पत्रकार की हत्या की साजिश में उछला तो कभी प्रधानमंत्री वीपी सिंह की ईमानदार छवि पर भ्रष्टाचार के दाग लगाने के लिए. वीपी सिंह के बेटे अजय सिंह के सेंटस किट्टस बैंक में कालेधन के फर्जी खातो के ब्योरे अखवारो में छपे तो इसके पीछे चन्द्रास्वामी का ही दिमाग माना गया.

राम मंदिर की राजनीति में भी चन्द्रास्वामी ने  1993 में अयोध्या में सोम यज्ञ का आयोजन कर अपना महिमामंडल चमकाने की पूरी कोशिश की. उनके यज्ञ में शामिल हुए बड़े विदेशी मेहमानो ने होटल में सुरा और सुंदरी का खुला खेल खेला.

सत्ता, सौदे और संबंधो को साधने के लिए सुरा और सुंदरी के तंत्र का सबसे बड़ा खुलासा लंदन में पामेला बोर्डेस ने किया था. 1982 की मिस इंडिया रहीं पामेला बोर्डेस ने ‘डेली मेल’ को दिए इंटरव्यू में दावा किया था कि अदनान ख़शोगी और चंद्रास्वामी के लिए वो यौन उपहार के तौर पर काम करती रहीं. ब्रिटेन के बड़े राजनेताओ के साथ हमबिस्तर होनेवाली पामेला बोर्डेस ने यहां तक दावा किया था कि अगर मैने जुबान खोल दी तो ब्रिटेन की सरकार गिर जाएगी.

चंद्रास्वामी ने डीडीए की जमीन पर दिल्ली के कुतुब इंस्टिट्यूशनल इलाके में विश्व धर्मायतन संस्थान आश्रम का निर्माण कराया और आश्रम के सामने वनविभाग की संजय वन की जमीन पर भी कब्जा करने की नाकाम कोशिश की.

बाहुबल, धनबल, सत्ताबल और साधना के बल पर चन्द्रास्वामी ने अपने तंत्र और जुगाड़ की जय-विजयमाला तैयार की थी वो उनकी मौत के पहले से ही टूटनी और बिखरनी शुरु हो गई थी.

चन्द्रास्वामी की जिंदगी जहां सियासत की काली सिध्दियो की कथा है तो उनकी मौत तंत्र के पुराने सिध्दांत को ही दोहराती नजर आती है.. होनी-अनहोनी के नियमो से खेलोगे तो एक दिन खुद भी उसमें खो जाआगे.

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