सबरीमाला मंदिर में 1500 साल बाद मिलेगा महिलाओं को प्रवेश ?

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केरल के सबरीमाला मंदिर में केरल सरकार अब महिलाओं के प्रवेश को राजी हो गई है. केरल की वामपंथी सरकार ने हलफनामा दायर करके कहा कि मंदिर में हर उम्र की महिलाओं को प्रवेश दिया जाना चाहिेए. सरकार का ये रुख 2007 में यूडीएफ सरकार के हलफनामे के विपरीत है. सबरीमाला मंदिर बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में केरल सरकार के इस कदम का विरोध किया है. ट्रस्ट का कहना है कि सरकार अपने स्टैंड नहीं बदल सकती. इस मामले की अगली सुनवाई 20 फरवरी को होगी.

सबरीमाला अयप्पा भगवान का मंदिर है. भगवान अयप्पा को ब्रह्मचारी और तपस्या लीन माना जाता है. इसलिए मंदिर में मासिक धर्म की आयु वर्ग की स्त्रियों का आना प्रतिबंधित है. मंदिर ट्रस्ट का दावा है कि यहां 1500 साल से महिलाओं की प्रवेश पर रोक है.

तिरुअनंतपुरम से लगभग दो सौ किलोमीटर दूर सहयाद्रि की पहाड़ियों पर बने इस मंदिर सबरीमाला मंदिर में पुरानी परंपरा के मुताबिक 10 से 50 तक की मासिक धर्म वाली महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी है. महिलाओं में सिर्फ बच्चियां और बूढ़ी औरतों को वहां आने की इजाजत है.

ये मामला पिछले 10 साल से कोर्ट में चल रहा है. 2007 में केरल सरकार ने भी मंदिर प्रशासन के समर्थन में कहा था कि धार्मिक मान्यताओं की वजह से महिलाओं को मंदिर में प्रवेश करने की इजाजत नहीं दी जा सकती.

जनहित याचिका दायर करने वाले वकीलों के संगठन इंडियन यंग लॉयर्स असोसिएशन ने दलील दी कि सती और दहेज जैसी पुरानी परंपराओं को भी खत्म किया गया है. याचिका में हर उम्र की लड़कियों के लिए मंदिर में प्रवेश की अनुमति मांगी गई है.

जनवरी और अप्रैल में भी सुनवाई के दौरान जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस एनवी रमण की पीठ ने मंदिर में महिलाओं के रोक पर आपत्ति जताई थी.

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