संपादकीय: शहीद की बेटी का अपमान क्यों ?

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हीद कैप्टन मनदीप सिंह की बेटी गुरमेहर किसी के लिए आदर्श से भरा चेहरा है, किसी के लिए वो देशद्रोहियो का मोहरा है. किसी के लिए वो हिंदुत्व और भगवा परिवार के खिलाफ नया धारदार तीर है. किसी के लिए वो यौन हिंसा के लिए नारी शरीर है. अति-आदर्शवादी शांति के पक्षधर कैमरो के लिए वो एक खूबसूरत गूंगी तस्वीर है. कुछ की नजर में देश का भगौड़ा दाउद इब्राहिम उससे बढ़िया है तो किसी के लिए वो मासूम गुड़िया है.

महज 20 साल की उम्र में युध्दोन्माद के जुनून, देशभक्ति और राष्ट्रवाद के बेसुरे राग और विचारधारा के नाम पर युवाओ की आपसी हिंसा पर गुरमेहर ने सवाल उठाकर एक नई उम्मीद जगाई है.3327

गुरमेहर शांति चाहती है, वो युध्द से नफरत करती है. वो कॉलेज और विश्वविद्यालय के ऐसे परिसर चाहती है जहां राजनीति ना हो जहां छात्र के मुद्दे छात्र ही उठाए. वो आजादी से अपनी राय रखे. वो किसी विचारधारा के अंधभक्त बनकर हिंसा के अधिकार के बजाए संवाद के संस्कार में यकीन करें.

लेकिन युवा गुरमेहर की अपेक्षाओ को अपने डंडे पर राष्ट्रवाद का झंडा तानने वाले और देश की संस्कृति और इसे बचाने के लिए सैंकड़ो साल से जारी संघर्ष-त्याग पर मनुवाद की मुहर लगाने वाले दोनो ही समझने को तैयार नहीं.

अपने पिता के प्यार और सामीप्य के बगैर पली-बढ़ी गुरमेहर अगर उस युध्द को ही सबसे बड़ा खलनायक बताती है जिसने उसके पिता के लाड़ प्यार से उसे हमेशा के लिए महरुम कर दिया तो इसमें क्या गलत है.?

गुरमेहर अगर इंसानियत के सबसे बड़े दुश्मन युध्द की आग से दॆश की जिंदगियो को बचाने के लिए पाकिस्तान के साथ शांति की वकालत करती है तो इसमें हर्ज ही क्या है.?3356

गुरमेहर देशभक्ति का सर्टिफिकेट बांटने वालो से ज्यादा देशभक्त है. देश के लिए उसके परिवार ने देशभक्तो की हुड़दंग ब्रिगेड से ज्यादा त्याग किया है. परिवार के मुखिया ने 2 साल की गुरमेहर को पीछे छोड़कर सर्वोच्च बलिदान दिया. देशवाशियो के आदर्शो, स्वाभिमान और मातृभूमि की रक्षा के लिए न्यौछावर हुए कैप्टन की बेटी की देशभक्ति पर शक जताकर उसपर गद्दार होने का दाग लगा दिया गया. देश के सम्मान के लिए उसके पिता अपने राष्ट्र पर मर मिटे लेकिन उनकी बेटी को बलात्कार की धमकी देने से देशभक्त नहीं हिचके.

गुरमेहर के पिता की तरह सरहद पर तैनात सेना के जवान ही देश के सबसे बड़े हीरो है. उनका शौर्य और बलिदान राष्ट्रवाद की सबसे बड़ी मिसाल है. आम नागरिको की देशभक्ति को भी सैनिको के त्याग की कसौटी पर अक्सर कसा जाता है. नोटबंदी के दौरान भी जनता के आक्रोश को कम करने के लिए सबसे बड़ी दलील यही दी गई कि आप नोट के बदले नोट लेने के लिए लाइन में खड़े है ना कि सरहद पर गोली खाने के लिए लाइन में तैनात है. शहीद की बेटी गुरमेहर के निजी राय पर उनकी देशभक्ति पर शक करना और उन्हे अपमानित करना, बलात्कार तक की धमकी देना बेहद शर्मनाक और डरावना है.

गुरमेहर के अपमान के लिए देशभक्ति के सर्टिफिकेट बांटने वाले और बीजेपी-संघ परिवार पर हमला करने के लिए छात्रो को कोरे आदर्शवाद की पट्टी पढ़ाने वाले वामपंथी दोनो जिम्मेदार है. रामजस कॉलेज में जेएनयू के वामपंथी और देशद्रोह के आरोपी छात्र नेता उमर खालिद को सेमिनार में बुलाना राष्ट्रवादी एबीवीपी और वामपंथी छात्रो के बीच टकराव की वजह बन गया.

लेडी श्रीराम कॉलेज की स्टूडेंट गुरमेहर ने 22 फरवरी को छात्रो से मारपीट की खबरो के बाद अपना फेसबुक प्रोफाइल पिक्चर बदल दिया. नए प्रोफाइल फोटो में वे एक तख्ती पकड़ी हुई नजर आईं. उस पर #StudentsAgainstABVP हैशटैग के साथ लिखा कि “मैं दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ती हूं. ABVP से नहीं डरती. मैं अकेली नहीं हूं. भारत का हर स्टूडेंट मेरे साथ है.”

गुरमेहर ने अपनी पोस्ट में लिखा कि, “ABVP का बेगुनाह स्टूडेंट्स पर किया गया हमला परेशान करने वाला है और इसे रोका जाना चाहिए. यह हमला प्रोटेस्ट कर रहे लोगों पर नहीं था, बल्कि यह डेमोक्रेसी के हर उस विचार पर हमला था, जो हर भारतीय के दिल के करीब है. यह आदर्शों, आजादी और देश के हर शख्स के हक पर हमला था.”

उसने आगे लिखा, “जो पत्थर तुम फेंकते हो, वे हमारे शरीर को चोट पहुंचाते हैं, लेकिन ये हमारे आदर्शों को चोट नहीं पहुंचा सकते. यह प्रोफाइल फोटो डर और नाइंसाफी के खिलाफ विरोध जाहिर करने का मेरा अपना तरीका है.”

सोशल मीडिया पर जुबानी हमले और बयानबाजी देखने के बाद गुरमेहर ने आरोप लगाया कि उन्हें और उनकी दोस्तो को एबीवीपी की ओर से रेप की धमकियां मिल रही हैं. शहीद की इस बेटी ने खुद की देशभक्ति पर सवाल उठने के बाद धमकियो को जवाब देने के लिए ट्विटर पर एक वीडियो पोस्ट किया. इस वीडियो में गुरमेहर एक तख्ती के साथ नजर आईं जिस पर लिखा था, “मेरे पिता को पाकिस्तान ने नहीं, जंग ने मारा था.”

मीडिया के सामने आकर गुरमेहर ने कहा कि, “मैं न तो डरूंगी और न ही झुकूंगी, मेरे पिता ने देश के लिए गोली खाई और मैं भी देश के लिए गोली खाने के लिए तैयार हूं. पत्थर उमर खालिद पर नहीं फेंके गए थे, वह वहां मौजूद ही नहीं था, पत्थर स्टूडेंट्स पर बरसाए गए थे, जो वहां मौजूद थे. मैं अपने देश और अपने साथियों को प्यार करती हूं और मैं उनके बोलने की आजादी का सपोर्ट करती हूं. एबीवीपी या कोई भी छात्र संगठन हो, किसी को हक नहीं है कि वो कानून-व्यवस्था अपने हाथ में ले. छात्रो के आंदोलन पर राजनीति नहीं होनी चाहिए, कैम्पस में सबके लिए सुरक्षित होने चहिए और किसी को भी अपनी बात कहने की आजादी मिलनी चाहिए.”

जेएनयू में मुंह पर कपड़ा बांधकर अपने देश विरोधी नारो से कन्हैया और उमर खालिद को फंसाने वाले असली मुजरिम तो अबतक नहीं पकड़े गए लेकिन कन्हैया और खालिद अपनी गिरफ्तारी और जेलयात्रा से दो ऐसे चेहरे बन गए जिन्हे वामपंथी अपना नायक मानते है जबकि देशभक्त इनमें देखते है राजद्रोह का रावण.

उमर खालिद और जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया की जेएनयू में “भारत तेरे टुकड़े होंगे इंशाअल्लाह-इंशाअल्लाह ” के नारे लगाने वालो पर चुनी हुई चुप्पी इनकी समझ पर शक पैदा करती है और आम जनता की नजर में इन्हे आज भी खलनायक बनाती है.

वामपंथ के खेमे में खड़ा होकर देश की बर्बादी का नारा लगाने वाले राष्ट्रद्रोही असल में पाकिस्तान के हमदर्द कश्मीरी अलगवावादी थे लेकिन कन्हैया और उमर खालिद ने ना तो पुलिस को इनके नाम बताए और ना ही सार्वजनिक मंच पर कश्मीरी अलगाववादियो के हाथो खिलौना बन जाने की अपनी नाकामी को स्वीकारा है.

दरअसल, देश की राजनीति में संघ परिवार और वामपंथ की लड़ाई आजादी के बाद से ही जारी है लेकिन वो इससे पहले कभी भी मुख्यधारा की राजनीति का हिस्सा नहीं रही. केन्द्र में नरेन्द्र मोदी की प्रचंड बहुमत से सरकार बनने के बाद से इन दोनो विचारधाराओं का टकराव बढ़ गया है. संघ अपनी करीब 100 साल की मेहनत और संकल्प के बाद हिदुत्व और राष्ट्रवाद के अपने प्रतीक और प्रमाणो को देश की मुख्यधारा में लाने में कामयाब हुआ है. लेकिन अपने ही गढ़ में हार चुके वामपंथियो को ये हजम नहीं हो रहा है.

संस्कृति, सहिष्णुता, गोमांस, विविधता, दलित और अल्पसंख्यको के अधिकार, देशभक्ति और राष्ट्ववाद के मुद्दो पर भगवा परिवार के देशभक्त और लाल सलाम करने वाले कामरेडो के बीच टकराव बढ़ रहा है. इनका खूनी संघर्ष केरल में तो दशको से जारी है लेकिन अब ये देश के दिल दिल्ली में भी उतर गया है. जेएनयू और हैदराबाद यूनिवर्सिटी से शुरु हुआ दोनो खेमों का प्रचार-प्रहार अब दिल्ली यूनिवर्सिटी के अलावा पुणे, वडोदरा और चंडीगढ़ के कॉलेजो तक पहुंच गया है.

समाज में असहिष्णुता फैलाने, साम्प्रदायिकरण और भगवाकरण के आरोप अक्सर संघ परिवार पर लगते रहे है लेकिन बड़ा सच यह भी है कि वामपंथी इतिहासकारो ने देश में इस्लाम के सैनिक-सांस्कृतिक हमलो से हिंदुत्व के संघर्ष को बड़ी सफाई से इतिहास की किताबो से बाहर ही रखा. विदेशी मुगलो की महानता का गुणगान करने वालो को उनके अन्याय के विरुध्द धर्म और संस्कृति की मशाल जलाने वाले भारतीय महापुरुष खास पसंद नहीं आए. अंग्रेजो की गुलामी के बाद धर्म के आधार पर देश का बंटवारा मंजूर हुआ. पाकिस्तान बन तो गया लेकिन वो इस्लाम के जेहाद के जूनून का ही बंदी बना रहा. देश को बर्बाद करने के लिए पाकिस्तान के मंसूबे आज भी बरकरार है. सरहद पर गोलियो की बौछार और बड़े शहरो में साजिश, आंतकी हमले और बम धमाके उसके नापाक इरादो के हथियार है.

आज पूरी दुनिया की नजर आंतक के अड्डे पाकिस्तान और अरब देशो के कट्टर इस्लाम के आतंक की आग पर है. लेकिन हमारा देश पहले की तरह विचारधारा के नाम पर कटा-बंटा है. हमारे घर में ही कश्मीर की आजादी की हिमायत कर देश की अखंडता को चुनौती देने वाले कुछ छुपे तो कुछ खुले बौध्दिक हमदर्द है. बंदूक की नली से क्रांति निकलने का सपना दिखाकर किसान, मजदूर और आदिवासी को नक्सली बनाने के तंत्र है. कौम के नाम पर अल्पसंख्यको को भड़काकर आतंकवादी बनाने के मुल्ला-मोलानाओं के मंत्र है. हिंदुत्व और संस्कृति के कीर्तन के शोर में घर में पीने का साफ पानी और टॉयलेट जैसी बुनियादी सुविधाएं दिए बिना देश को 100 स्मार्ट सिटी से सजाने के हवाहवाई वादे और इरादो का प्रचार प्रबंध है.

ऐसे देश के लिए हंसते-हंसते जान देने वाले शहीद धन्य है. उनकी त्याग भावना को शत-शत नमन. शहीदो की संतान हमारा खून और हमारी एकता की पहचान है. हर किसी को गुरमेहर पर गर्व करना चाहिए कि देश की बेटियां किसी क्रिकेटर, फिल्म स्टार, खिलाड़ी और अनाड़ी नेता से ज्यादा संवेदशील और समझदार है. ये बेटियां इतनी मजबूत है जो अपने सिर पर पिता के हाथ के बिना भी मां के प्यार-दुलार में पढ़ सकती है, लड़ सकती है, सबकुछ समझ सकती है और सबको सबकुछ समझा सकती है. देश केे युवाओं को कॉलेज-यूनिवर्सिटी में लड़ाने-भिड़ाने वाली किसी विचारधारा का चेहरा या मोहरा बने बिना वो अपने दिल की बात साहस और ईमानदारी के साथ सबके सामने रख सकती है.

 

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