लालू यादव के चारा घोटाले के हर केस में अलग से सुनवाई हो- सुप्रीम कोर्ट

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सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाई कोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए लालूप्रसाद यादव पर चारा घोटाले से जुड़े अलग-अलग केस में समान धाराओं मे मुकदमा चलाने का आदेश दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि अपराध अलग-अलग और बार-बार हुए तो हर केस में एक सी धाराए लगाई जा सकती है. सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत को 9 महीने के भीतर सुनवाई पूरी करने का आदेश दिया है.

सोमवार को न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा और न्यायमूर्ति अमिताव रॉय की पीठ ने कहा कि, “हमारा मानना है कि प्रत्येक अपराध के लिए पृथक सुनवाई होनी चाहिए.”

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब देवघर मामले में भी लालू यादव के खिलाफ अलग से मुकदमा चलेगा. लालू यादव पर अब 120- बी यानी आपराधिक साजिश, 409- अमानत में खयानत,420- धोखाधड़ी,467- जालसाज़ी, 468- धोखाधड़ी के लिए जालसाजी का मुकदमा चलेगा. इसके अलावा भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धारा 13(1)सी डी और 13(2)जैसी गंभीर धाराओं के तहत भी मुकदमा चलेगा.

झारखंड हाई कोर्ट ने 2014 में सीआरपीसी की धारा 300 को आधार बनाकर आदेश दिया था कि, “लालू यादव के खिलाफ चारा घोटाले के दूसरे मामले में इन्हीं धाराओं के तहत मुकदमा चल चुका है. लिहाजा दोबारा इन्हीं धाराओं के तहत मुकदमा नहीं चल सकता है.”

झारखंड हाई कोर्ट के इस आदेश के खिलाफ सीबीआई ने सुपीम कोर्ट में अपील की थी. सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को झारखंड हाई कोर्ट के फैसले को पलट दिया है.

चारा घोटाला में लालू प्रसाद पर 6 केस है. एक केस में लालू यादव को 5 साल की सजा हो चुकी है और इसी वजह से वो कोई चुनाव भी नहीं लड़ सकते है.

बिहार के करीब 950 करोड़ रुपए के चारा घोटाले में लालू यादव के अलावा बिहार के पूर्व मुख्समंत्री जगन्नाथ मिश्रा समेत कुल 50 से ज्यादा आरोपी हैं, जिनमें नेता, अफसर और चारा सप्लायर के नाम है. तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू यादव के कार्यकाल के दौरान भी पशुपालन विभाग में चारे की सप्लाई फर्जी बिलो के जरिए दिखाकर रकम निकाली गई. कागजो में चारा सप्लाई होता रहा और सरकारी खजाना खाली होता रहा.

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