रुचिका गिरहोत्रा यौन उत्पीड़न और खुदकुशी केस में पूर्व डीजीपी राठौर दोषी- सुप्रीम कोर्ट

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सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा के पूर्व डीजीपी एसपीएस राठौर को पंचकूला के रुचिका गिरहोत्रा यौन उत्पीड़न और खुदकुशी मामले मे दोषी ठहराया है. सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को सही करार दिया है लेकिन, सुप्रीम कोर्ट ने उसे सुनाई गई डेढ़ साल कैद की सजा को घटा कर छह माह कर दिया. कोर्ट ने कहा राठौर को और सजा काटने की जरूरत नहीं है. उसने अब तक जो सजा काटी है वह काफी है.

14 साल की रुचिका राठौर की बेटी की सहेली और टेनिस की उभरती खिलाड़ी थी. हरियाणा के तत्कालीन डीजीपी एसपीएस राठौर ने छेड़छाड़ की थी और लगातार यौन उत्पीड़न किया था. राठौर के रसूख और रुतबे से प्रभावित पुलिस का रवैया देखकर रुचिका ने निराश होकर आत्महत्या कर ली थी. रुचिका को न्याय दिलाने के लिए उसकी एक सहेली ने न्याय की लंबी लड़ाई लड़ी.

राठौर के उत्पीड़न से परेशान रुचिका ने 28 दिसंबर, 1993 पंचकूला के सेक्टर छह में अपने घर पर आत्महत्या कर ली. राठौर ने अपने रुतबे का इस्तेमाल कर मामले को दबाना चाहा और रुचिका के परिवार को भी प्रताडि़त किया. रुचिका को इंसाफ दिलाने के लिए उसकी लड़ाई उसकी सहेली अनुराधा और उसके पिता आनंद प्रकाश ने लड़ी. मामला सीबीआइ को सौप दिया गया लेकिन 2010 में सीबीआई ने फाइल बंद कर क्लोजर रिपोर्ट दे दी. लेकिन शिकायतकर्ता आनंद प्रकाश ने हिम्मत नही हारी और उन्होने सुप्रीम कोर्ट में अपील की.

राठौड़ को जिला अदालत ने डेढ़ साल कैद की सजा सुनाई. इस सजा पर हाई कोर्ट ने भी मुहर लगाई. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में शुक्रवार को राठौर को दोषी माना लेकिन उसकी सजा घटाकर 6 महीने कर दी.

सुप्रीम कोर्ट से पहले हाई कोर्ट ने राठौर को कोई राहत देने से कार कर दिया था. एक सितंबर, 2010 को पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने राठौर की उस याचिका को खारिज करते हुए कहा कि उसने जो हरकत की है वह किसी भी आला अधिकारी के लिए ‘शर्मनाक’ है.

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