संपादकीय: योगी और दागी का ये रिश्ता क्या कहता है ?

0
212

योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश की कायापलट करने और राज्य में कानून का राज स्थापित करने के लिए अपने तूफानी दौरे, दम-खम और दावो से जो भरोसा जताया था वो एक झटके में उन्ही के घर गोरखपुर में चटक गया. योगी ने मुख्यमंत्री बनते ही गुंडो को उत्तर प्रदेश छोड़कर जाने की चेतावनी देकर नई उम्मीद जगा दी थी लेकिन ये उम्मीद शनिवार को उस मंच पर टूट गई जिस पर योगी के साथ अपनी पत्नी की हत्या का आरोपी निर्दलीय विधायक अमनमणि त्रिपाठी बड़ी शान से सजा नजर आया. राज्य में योगी के साथ दागी का ऐसा प्रेम देखकर सब चौंक गए.

शनिवार को गोरखपुर में मंच पर योगी ने पहले अपने संबोधन में दागी विधायक के नाम के आगे श्री लगाकर उसका सम्मान बढ़ाया. राज्य की पुलिस और प्रशासन को अपना रौब और रसूख दिखाने के लिए अमनमणि ने योगी के पैर छूकर नजदीकी जताई-दिखाई तो योगी ने भी उसे निसंकोच आशीर्वाद देकर एक तरह से अभयदान ही दे दिया.

ये सब उसी मंच पर हुआ जहां से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, “जिन्हें क़ानून के राज में विश्वास नहीं है, वे लोग उत्तर प्रदेश अवश्य छोड़ दें. उनके दिन अब लद चुके हैं.”3920

मंच से पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए योगी ने कहा कि,“राज्य में क़ानून और व्यवस्था में परिवर्तन दिखा है और अगले एक महीने में राज्य में ये परिवर्तन और तेज़ दिखाई देगा.” लेकिन हैरानी की बात ये है कि योगी को अपने दावे को खोखला साबित करने वाला बगल में विराजमान साक्षात विरोधाभास अमनमणि नहीं दिखा.

उत्तर प्रदेश में प्रचंड मोदी लहर के बाद भी जाति और धर्म के समीकरण की वजह से दागी मुख्तार अंसारी, राजा भैया और अमनमणि जीतने में कामयाब रहे. अमनमणि त्रिपाठी पर अपनी पत्नी सारा की हत्या का आरोप है और सीबीआई मामले की जांच कर रही है. इस मामले में अमनमणि जेल की हवा भी खा चुका है.3922

अमनमणि त्रिपाठी ने अपराध और राजनीति का गठजोड़ हत्या के आरोप में जेल में बंद अपने पिता अमरमणि त्रिपाठी से सीखा है. पूर्वांचल का कुख्यात अमरमणि त्रिपाठी अपनी जाति और जुर्म के बल पर राजनीति और सत्ता को साधता रहा है. मुख्यमंत्री, मंत्री और मठ से नजदीकी जता कर वो अपनी समानांतर सत्ता चलाता रहा. कभी वो बीजेपी के मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह के बगल में खड़ा रहा तो कभी समाजवादी खेमे में शामिल हो गया.

 

अमनमणि के अय्याश पिता अमरमणि त्रिपाठी ने युवा कवियित्री मधुमिता शुक्ला के साथ रिश्ता बनाकर उसे अपनी वासना का खिलौना बना लिया. उसके अनव्याही मां बनने की नौबत आई तो मधुमिता की हत्या करवा दी. इस साजिश में अमरमणि की पत्नी ने भी साथ दिया तो उसे भी जेल जाना पड़ा.3923

घर से ही अपराध की सीख लेने वाले अमनमणि ने सारा से प्रेमविवाह किया. लेकिन जब मनभर गया तो सारा को रास्ते से हटा दिया. अपने गुनाह को छुपाने के लिए अमनमणि ने हाइवे में कार हादसे में पत्नी की मौत की कहानी गढ़ी लेकिन कार में मौजूद होने के उसके दावे के बावजूद उसे कोई चोट नहीं आई. इसी विरोधाभास ने उसकी पोल खोल दी और पत्नी की हत्या के आरोप में उसे जेल भी जाना पड़ा.

अमनमणि की आपराधिक छवि की वजह से चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी ने उससे किनारा कर लिया. लेकिन महाराजगंज के नौतनवां सीट से वो निर्दलीय विधायक बनने में कामयाब रहा. पत्नी की हत्या करने के आरोप के अलावा अमनमणि पर अपहरण और मारपीट के मामले भी चल रहे हैं.

जाति और धर्म में बंटे समाज में किसी सीट पर दागी की चुनावी जीत को तो समझा जा सकता है लेकिन समाज, समय बदलकर गुंडो से सुरक्षा देने का दावा करने वाले मुख्यमंत्री योगी की उससे नजदीकी की मजबूरी समझ से परे है.

राज्य की बहन-बेटियो को छेड़छाड़ से बचाने के लिए रोमियो अभियान चलाने वाले मुख्यमंत्री योगी के मंच पर अमनमणि की मौजूदगी ने विपक्ष को भी बीजेपी सरकार पर हमला करने का मौका दे दिया है. विपक्ष के नेता कह रहे है कि, “मुख्यमंत्री एक ओर क़ानून व्यवस्था की बात करते हैं तो दूसरी तरफ़ हत्या के आरोपी के साथ मंच शेयर करते हैं.”

चिंता की बात ये है कि उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ बेहतर क़ानून व्यवस्था के नाम पर चुनाव जीतकर आए हैं. लेकिन उनकी सरकार और वो खुद विरोधाभाषी संकेत भी दे रहे हैं.

सत्ता के संरक्षण में आम लोगों पर जुल्म ढाने वालों के दिन लदने की बात योगी कह रहे है लेकिन अमनमणि जैसे उनकी बगल में बैठकर बीजेपी में शामिल होने की हसरते पाल रहे है.

राज्य में बीजेपी के नेताओ के पुलिस से टकराने, टोल पर दादागिरी करने और धौंस-धमक की खबरे आई तो जनता ने उसे जीत का जोश मान लिया लेकिन योगी की दागी से ऐसी दोस्ती पर सवाल उठेंगे ही…और लगातार उठ भी रहे है. इसी से जुड़ा सवाल ये भी है कि क्या योगी जी सुन रहे है ?

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY