संपादकीय: ये फांसी जरुरी हैं !

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सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के निर्भया गैंगरेप केस में 4 मुजरिमो की फांसी की सजा बरकरार रखी है लेकिन इन्हे फांसी कब लगेगी ये कहना फिलहाल मुश्किल है. ये लोग अब राष्ट्रपति के पास अपनी क्षमायाचना की याचिका लगा सकते है. देश की राजधानी दिल्ली में 5 साल पहले 6 लोगो ने चलती बस में निर्भया को अपनी दरिंदगी का शिकार बनाया था. इनमे से एक बस का ड्राइवर राम सिंह तिहाड़ जेल में खुद ही फांसी लगाकर आत्महत्या कर चुका है जबकि निर्भया के साथ सबसे ज्यादा जुल्म और दरिंदगी करने वाला नाबालिग 3 साल बाल सुधार गृह में रहने के बाद आजाद है.

सुप्रीम कोर्ट ने इनके गुनाह को दुर्लभतम अपराध माना है लेकिन किसी भी सजा का मकसद किसी की जिंदगी लेना है या उसमें पश्चाताप जगाकर सुधरने का मौका देना है. ये पुरानी बहस फिर से जिंदा हो गई है. मृत्युदंड का विरोध करने वाले इनकी मौत की सजा के फैसले से असहमत रहेंगे.

दिल्ली में 16 दिसंबर, 2012 की शाम निर्भया अपने दोस्त के साथ पीवीआर साकेत से फिल्म देख कर आई थी. दोनो घर जाने के लिए मुनिरका के बस स्टैंड पर खड़े थे. उसी शाम शराब पीकर आसान शिकार की तलाश में 6 लोग खाली बस लेकर निकले. इनमे एक नाबालिग भी था उसी ने निर्भया और उसके दोस्त को मुनिरका के बस स्टैंड से चार्टेड बस में बहाने से बैठा लिया.

निर्भया और उसके दोस्त के बस में बैठते ही इस चौकड़ी के अंदर का शैतान जाग गया. इन्होने पहले निर्भया के साथ गाली-गलौज शुरु कर दी. निर्भया के दोस्त ने उनके व्यवहार पर एतराज जताया तो उसे लोहे की रॉड से बुरी तरह से मार-पीटकर चुप करा दिया गया.

चलती बस के शीशों के परदे खोलकर और लाइट बुझाकर बस के पिछले हिस्से में निर्भया के साथ हैवानो का खौफनाक जुल्मो-सितम शुरु हो गया. गैंगरेप के दौरान निर्भया को डराने, धमकाने के लिए उसे थप्पड़, लात-घूंसो से मारा गया. निर्भया के शरीर को इन्होने बुरी तरह से घायल कर दिया. उसके होठ, चेहरे और सीने पर दांतो से काटकर गहरे घाव कर दिए. प्राइवेट पार्टस में इन्होने आगे और पीछ से लोहे की रॉड और हाथ डालकर निर्भया को लहू-लुहान कर दिया.

निर्भया को ओरल सेक्स के लिए धमकाया गया लेकिन उसके इंकार के बाद अननैचुरल सेक्स से सताया गया. अपनी हवस पूरी करने के बाद इन्होने निर्भया और उसके दोस्त के मोबाइल, क्रेडिट कार्ड, घड़ी, पैसे, पर्स, अंगूठी और सारे कपड़े लूट लिए. कड़ाके की सर्दी की रात में दोनो को नंगाकर चलती बस से नीचे फैंक दिया. बस से फैंकने के बाद अपने गुनाह के सबूत मिटाने के लिए निर्भया और उसके दोस्त को बस से कुचलने की भी कोशिश की लेकिन दोनो ने किसी तरह से साइड में सरककर अपनी जान बचाई.

महिपालपुर के फ्लाईओवर के पास अंधेरे में बिना कपड़ो के दोनो को तड़पते, कराहते और बचाओ-बचाओ की उनकी आवाज सुनकर राहगीरो की उनपर नजर पड़ी जिन्होने पुलिस को फोन कर मौके पर बुलाया.

सर्दी की ठिठुरती रात में एक चादर को दो हिस्सो में फाड़कर उन्हे तन ढकने के लिए दी गई. पुलिस ने दोनो को सफदरजंग अस्पताल ले जाकर मेडिकल करवाया.

निर्भया के शरीर के साथ हुई दरिंदगी देखकर डॉक्टर भी हैरान रह गए. शरीर से लगातार बहते खून, जख्म, इन्फेक्शन, सदमे और दर्द को झेलते हुए निर्भया ने जैसे-तैसे कभी बोलकर तो कभी इशारो में अपनी खौफनाक कहानी बताई.

निर्भया को बेहतर इलाज के लिए सिंगापुर के अस्पताल में ले जाया गया लेकिन 10 दिन बाद उसकी मौत हो गई. 23 साल की निर्भया तो सदा के लिए सो गई लेकिन उसकी दर्दनाक मौत सोए हुए देश को जगा गई.

देश की बेटियो को आए दिन होने वाले बलात्कार से बचाने के लिए जनता सड़को पर उतर आई. बिना किसी नेतृत्व के ही हर रोज तेज होते जनता के आंदोलन के तेवर देखकर दिल्ली पुलिस और केन्द्र सरकार की भी नींद उड़ गई. पुलिस की दर्जनो टीमे मुजरिमो के सुराग जुटाने में जुट गई. राजधानी दिल्ली की सड़को पर चलती बस में गैंगरेप करने वालो का सुराग सीसीटीवी फुटेज में सड़क पर बस की तस्वीरो से मिला. बस का सफेद रंग और उसपर ट्रेवल एजेंसी का नाम और नम्बर मिलने पर पुलिस बस के मालिक तक पहुंच गई. बस मालिक से ड्राइवर का ब्योरा मिलते ही बस का ड्राइवर राम सिंह और उसकी शैतान चौकड़ी कानून के शिकंजे में आ ही गई.

निर्भया के माता-पिता को शुरु में इस बात का मलाल रहा कि उनकी बेटी ने दोस्त के साथ फिल्म देखने जाने की बात उनसे छुपाई. निर्भया के पिता ने तो यहां तक कह दिया था कि उनकी बेटी एक लड़के की वजह से दरिंदो का शिकार बन गई. वो लड़का चाहता तो हमारी बेटी को बचा सकता था.

निर्भया का केस स्त्री सम्मान और सुरक्षा, बढ़ते सामूहिक बलात्कार, सड़को पर पुलिस की पहरेदारी की रस्मअदायगी, सुस्त कानून व्यवस्था, चमचमाते शहर के स्लम में पलते-बढ़ते बैखौफ मुजरिम, नाबालिगो के दिलदहलाने वाले कारनामे, बलात्कार पीड़िता के इलाज और न्याय के संघर्ष के दर्द, देश के समय, सोच और सुरक्षा का एक पूरा समाजशास्त्र है.

निर्भया के केस में आम आदमी के आंदोलन करने, सड़क पर बस से जुड़े नियम-कायदो और नाबालिगो की उम्र से जुड़े कानूनो में बदलाव होने और दोषियो की फांसी की सजा ने जहां एक मिसाल कायम की है वहीं न्याय व्यवस्था और समाज में महिलाओं की सुरक्षा के भरोसे को भी जिंदा रखा है.

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