‘मैं अब कभी मणिपुर वापस नहीं जाऊंगी, मणिपुर ने मुझे नकार दिया’

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मानवाधिकार कार्यकर्ता ईरोम शर्मिला अब मणिपुर में वापस नहीं जाना चाहती. ईरोम शर्मिला ने टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में यह बात कही है. ईरोम शर्मिला ने कहा है कि वह मणिपुर में कभी वापस नहीं जाएंगी. 16 साल मणिपुर के अधिकारों की लड़ाई लड़ने वाली ईरोम शर्मिला ने यह कठोर फैसला मणिपुर विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद लिया है. ईरोम को विधानसभा चुनाव में केवल 90 वोट मिले थे. जिस मणिपुर के लिए अफ्स्पा के खिलाफ ईरोम 16 साल अनशन पर रही उसी मणिपुर ने उसे विधानसभा चुनाव में 90 वोट के लायक समझा. ईरोम को चुनाव में केवल 90 वोट मिलने का इतना दर्द है कि वह अब मणिपुर वापस नहीं लौटना चाहती.

ईरोम ने टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में कहा, मैंने मणिपुर के लिए 16 साल संघर्ष किया लड़ाई लड़ी लेकिन मणिपुर ने मुझे नकार दिया.

ईरोम ने आगे कहा, ‘मैं राजनीति से पूरी तरह परेशान हो चुकी हूं. हालांकि मैं आफ्सपा के खिलाफ अपना संघर्ष किसी और मंच के जरिए जारी रखूंगी. मैं अभी ग्रीन अलाएंस से जुड़ी हूं, जो विभिन उद्देश्यों पर काम करने वाली एक सामाजिक संस्था है. हम इसके माध्यम से इस दमनकारी सैनिक नियम को हटाने के लिए कैंपेन चलाने की योजना बनाएंगे.

आपको बता दे, ईरोम चुनाव हार के बाद से तमिलनाडु के कोडईकनाल में रह रही है. हाल ही में ईरोम ने ब्रिटिश नागरिक डेसमंड कूटिन्हो के साथ शादी करने के लिए आवेदन दिया है. स्पेशल मैरिज एक्ट के जरिए ईरोम और डेसमंड जल्द ही शादी के बंधन में बंध जाएंगे.

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