मदर टेरेसा पर मोदी के मन की बात से वीएचपी नाराज !

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आज अपने ‘मन की बात’ रेडियो कार्यक्रम में मदर टेरेसा को संत की उपाधि के सम्मान को भारत का सम्मान बताने पर वीएचपी यानी विश्व हिंदू परिषद ने कड़ा एतराज जताया है. वीएचपी का आरोप है कि मदर टेरेसा ने सभी धर्मो को बराबर नहीं माना लिहाजा पीएम को उनकी इतनी तारीफ से परहेज करना चाहिए था.

मोदी ने ‘मन की बात’ रेडियो कार्यक्रम में कहा “ मदर टेरेसा को 4 सिंतबर को संत की उपाधि दी जा रही है. इस मौके पर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के नेतृत्व में भारत सरकार का एक दल भी वेटिकन सिटी जाएगा. मदर टेरेसा को सम्मान भारत का सम्मान है और ये भारत के लिए गौरव की बात है.”

पीएम के ऐलान पर वीएचपी प्रवक्ता सुरेंद्र जैन ने कहा कि “मदर टेरेसा के बारे में बहुत सारे विषयो की जानकारी प्रधानमंत्री को नहीं होगी. मदर टेरेसा ने कभी नहीं कहा कि सभी धर्म बराबर हैं. प्रधानमंत्री को बोलने से पहले सोचना चाहिए था. मदर टेरेसा अपने लिए महंगे इलाज़ करवाती थीं जबकि बाकियों को प्रार्थना से ठीक करती थीं.”

मदर टेरेसा का जन्म 26 अगस्त, 1910 को मेसिडोनिया के स्कोपजे में हुआ था. 17 साल की आयु में सिस्टर लोरेटो के साथ काम शुरू करने के बाद वह कलकत्ता गईं, जहां तपेदिक की बीमारी के दौरान उन्होंने तय किया कि उन्हें कॉन्वेंट छोड़कर गरीबों के बीच रहना चाहिए.

मदर टेरेसा ने झुग्गी बस्तियों में गरीब बच्चों को पढ़ाया और बीमार-बूढ़ों का उनके घर में इलाज किया. मदर टेरेसा को नोबेल पुरस्कार शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया. 87 साल की आयु में 1997 में निधन हो गया था.

मदर टेरेसा के आलोचको का कहना है कि वो भारत में ईसाई धर्म के प्रचार के लिए आई. और लोगो का धर्मांतरण करवाने के लिए उन्होने भारतीय नागरिकता भी ली. संत बनने के लिए चमत्कारिक शक्तियां होना जरुरी है लेकिन उनकी कृपा के कोई सबूत नहीं है वो एक नन थी जो मानवता नहीं बल्कि ईसाई धर्म को सर्वोपरि मानती थी.

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