बिलकिस बानो केस में 11 को उम्रकैद की सज़ा

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बॉम्बे उच्च न्यायालय ने गुरुवार को बहुचर्चित बिलकिस बानो दुष्कर्म एवं उसके परिजनों की हत्या के मामले में 11 दोषियों को उम्रकैद की सज़ा सुनाई है. इसके अलावा हाई कोर्ट ने निचली अदालत से छूटे सात आरोपियों जिनमें कुछ पुलिसकर्मी और कुछ डॉक्टर भी शामिल है के रिहाई के आदेश को भी खारिज कर दिया है. न्यायमूर्ति वीके ताहिलरमानी और मृदुला भाटकर की खंडपीठ ने निचली अदालत के फैसले को सही माना है. निचली अदालत ने 12 लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी जिसके बाद दोषिय़ों ने इसे हाई कोर्ट में चुनौती दी थी. इसमें से एक दोषी की मौत पहले ही हो चुकी है. इसलिए हाई कोर्ट ने 11 दोषिय़ों पर सज़ा को बरकरार रखा है.

न्याय मिलने के बाद बिलकिस ने अपनी प्रतिक्रिया दी, उन्होंने कहा, एक इंसान, नागरिक, महिला तथा मां के रूप में मेरे अधिकारों का बर्बर उल्लंघन हुआ था. लेकिन मुझे देश की लोकतांत्रिक संस्थानों पर भरोसा था. अब हम भयमुक्त जीवन जी सकते है, क्योंकि हमें धमकियां मिलती रहती थी.

होई कोर्ट ने पांच पुलिसकर्मियों और दो डॉक्टरों समेत सात लोगों को भारतीय दंड संहिता की धारा 218 (अपने कर्तव्य का निवर्हन न करना) और धारा 201 (साक्ष्यों से छेड़छाड़) के तहत दोषी ठहराया जाता है. निचली अदालत ने इन दोषियों को रिहा कर दिया था. लेकिन हाई कोर्ट ने इसे निरस्त कर इन्हें भी जेल पहुंचा दिया है. बिलकिस बानो को 15 साल बात न्याय मिला है. कोर्ट ने दोषियों को 430 पेजों की उम्रकैद की सज़ा सुनाई है.

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