पटेल से हार गई अमित शाह की ‘चाणक्य’ नीति

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मंगलवार को पूरे दिन चले घमासान के बाद आखिरकार कांग्रेस को जीत का स्वाद चखने को मिला. तीन राज्यसभा सीटों पर हुए चुनाव में भाजपा को दो और कांग्रेस को एक सीट मिली है. भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी को गुजरात से राज्यसभा में प्रवेश मिल गया. वहीं कांग्रेस के अहमद पटेल ने हारी हुई बाजी को अपने नाम करते हुए पांचवीं बार राज्यसभा में एंट्री मारी है.

लंबे ड्रामे के बाद गुजरात विधानसभा में हुए राज्यसभा के चुनाव में अमित शाह और स्मृति ईरानी को 46-46 वोट मिले, वहीं अहमद पटेल ने 44 वोटों के साथ जीत दर्ज की. घमासान कांग्रेस के बागी नेताओं राघवभाई पटेल और भोलाभाई गोहिल के वोटो को रद्द करने को लेकर था. इन दोनों बागी नेताओं ने कांग्रेस के उम्मीदवार को वोट ना देकर बीजेपी के उम्मीदवार को वोट दे दिया. क्रॉस वोटिंग तो हुई लेकिन इन बागी नेताओं ने अपने वोटो को अमित शाह को दिखाया. इसी को लेकर कांग्रेस ने इन वोटो को रद्द करने की मांग दिल्ली में चुनाव आयोग से कर डाली.

2 घंटे के अंतराल में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिल्ली में चुनाव आयोग के पास बार बार पहुंचे. पी. चिदंबरम, आनंद शर्मा, रणदीप सुरजेवाला जैसे बड़े कांग्रेसी नेताओं के प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग से मुलाकात की और इन वोटो को रद करने की मांग की. इसके बाद आखिरकार चुनाव आयोग ने कांग्रेस की बात को माना और वोट रद कर दिए. चुनाव आयोग ने देर रात इन दोनो बागी विधायकों के वोट रद कर दिए और अहमद पटेल को विजयी घोषित किया. चुनाव आयोग ने संविधान के अनुच्छेद 324 का इस्तेमाल करते हुए यह फैसला लिया.

इस घमासान के बाद कह सकते है कि बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की चाणक्य नीति गुजरात के राज्यसभा चुनाव में सफल नहीं रही और अहमद पटेल एक बार फिर कांग्रेस के चाणक्य बनकर उभरे. वक्त भी कितना अजीब होता है, जहां अहमद पटेल के इशारों पर कभी लोकसभा और राज्यसभा का गणित तय होता था आज उनका अपनी सीट के लिए ही गणित बिगड़ता दिखा. लेकिन नए नए चाणक्य बने अमित शाह कांग्रेस के सबसे पुराने चाणक्य से कैसे आगे निकल सकते थे. सियासत की बिसात पर दोनों ने कई चाले चली लेकिन अहमद पटेल आखिरकार एक बार फिर इस बिसात के बाजीगर बनकर सामने आए.

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