निर्भया केस: सुप्रीम कोर्ट ने चारों दोषियों की फांसी की सज़ा को बरकरार रखा

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सुप्रीम कोर्ट ने निर्भया केस में चारों दोषियों को फांसी की सज़ा सुनाई है. सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट और निचली अदालत के फैसले को सही माना है. 23 साल की मेडिकल छात्रा से रेप का यह मामला पांच साल पुराना है. इस घटना के बाद पूरे देश में लोग सड़कों पर महिलाओं की सुरक्षा के लिए निकल गए थे. साथ ही सरकार को महिलाओं के लिए सशक्त कानून बनाने के लिए मजबूर होना पड़ा. आखिरकार 2013 में भारतीय दंड संहिता में संशोधन से जुड़ा कानून संसद ने पास किया.

निचली अदालत ने इस केस में चारों दोषियों को फांसी की सज़ा सुनाई थी. साथ ही एक दोषी ने पहले ही तिहाड़ जेल में खुद को फांसी लगा ली थी. इन दोषियों में एक नावालिग था जिसको कानून कमजोर होने के चलते तीन साल की सज़ा के बाद ही छोड़ दिया गया.

हाई कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को सही माना था. लेकिन दोषी अक्षय ठाकुर, विनय शर्मा, पवन कुमार, और मुकेश ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी. सुप्रीम कोर्ट ने इन दोषियों की याचिका को खारिज कर फांसी की सज़ा को बरकरार रखा है. सुप्रीम कोर्ट ने जैसे ही यह फैसला सुनाया तो कोर्ट रूम के अंदर तालियों से इसका स्वागत किया गया.

कोर्ट ने माना है कि ऐसे जघन्य अपराध के लिए किसी भी तरह की रियायत नहीं दी जा सकती है. इस घटना ने पूरे देश को हिला कर रख दिया था. आपको बता दे, 16 दिसंबर, 2012 को निर्भया के साथ छह दोषियों ने बालात्कार किया था. इस जघन्य अपराध के बाद सभी लड़की को एक किनारे फेंककर चले गए थे. दिल्ली पुलिस ने मेडिकल जांच और साइंटिफिक रिपोर्ट के जरिए इस अपराध को सिद्ध किया.

इस फैसले को जस्टिस दीपक मिश्रा की बेंच ने सुनाया है. तीन जजो की इस बेंच ने सहमति से चारों दोषियों को फांसी की सज़ा देने पर मुहर लगाई है.

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