नक्सली हमले में सीआरपीएफ के 12 जवान शहीद !

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त्तीसगढ़ के सुकमा जिले में नक्सली हमले में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के 12 जवान शहीद हो गए जबकि तीन अन्य जवान घायल हुए हैं. ये जवान भेज्जी क्षेत्र में इंजरम भेज्जी मार्ग की सुरक्षा के लिए निकले थे लेकिन बीच रास्ते में जंगलों में छुपे नक्सलियों ने सीआरपीएफ के गश्ती दल पर घात लगाकर हमला कर दिया.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नक्सलवादियों के हमले में सीआरपीएफ के जवानों की मौत पर दुख व्यक्त करते हुए ट्वीट किया कि, “सुकमा में सीआरपीएफ जवानों की मौत पर दुखी हूं. शहीदों को श्रद्धांजलि और उनके परिजन के प्रति संवेदना. प्रार्थना है कि घायल शीघ्र स्वस्थ हों. गृहमंत्री राजनाथ सिंह जी से सुकमा के हालात पर बात की है. वह हालात का जायजा लेने सुकमा जा रहे हैं.”

सीआरपीएफ के करीब 100 जवान जब भेज्जी और कोत्ताचेरू गांव के पास पहुंचे तब जंगल में छुपे बैठे नक्सलियों ने फायरिंग शुरु कर दी. इस हमले में सीआरपीएफ के 11 जवानों की मौके पर ही मौत हो गयी. जबकि एक जवान ने अस्पताल में अपनी अंतिम सांस ली.

नक्सली हमले में एक दर्जन से अधिक जवानों के मारे जाने के बाद केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने रायपुर पहुंचकर कहा कि, “ये हमला नक्सलियों की हताशा के चलते बौखलाहट में की गई कायराना हरकत है. शहीद जवानों को शहादत व्यर्थ नहीं जायेगी.”

राजनाथ सिह ने यह भी घोषणा की है कि, “सरकार ने निर्णय लिया है कि किसी भी हालत में शहीद जवानों के परिवारों को 1 करोड़ रुपये से कम मुआवजा राशि नहीं मिलना चाहिए.”

3501देश में नक्सली हमले और हिंसा की समस्य़ा करीब 40 साल पुरानी है. खूनी क्रांति में यकीन करने वाले अति वामपंथी नक्सली आतंकवादी संगठन है. ये संगठन स्थानीय आदिवासियो को जल, जंगल और जमीन के अधिकार दिलाने के बहाने उन्हे देश के खिलाफ भटका और भड़काकर अपने साथ जोड़ते है. वो जंगलो में कैप लगाकर नए भर्ती हुए युवाओ को हथियार चलाने और हमला करने की ट्रैनिंग भी देते है. टॅनिंग के बाद नक्सली मारो और हथियार लूटकर भागने की नीति पर हमला करते है. वो हर साल मार्च से जून के बीच सुरक्षा बलों पर उनके हमले बढ़ जाते है. जंगल और जमीन के चप्पे-चप्पे से वाकिफ नक्सलियो के लिए घात लगाकर हमला करना और फिर भाग जाना आसान होता है.

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