संपादकीय: दिल्ली में आप पार्टी की जीत के 70 कारण !

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देश की राजधानी दिल्ली में अरविंद केजरीवाल की सरकार ने 14 फरवरी को अपने दो साल पूरे कर लिए है. आप की सरकार ने बिजली, पानी के बिल माफकर, सरकारी स्कूलो में शिक्षा सुधार कर और मोहल्ला क्लिनिक खोलकर जनता का दिल जीतने की कोशिश की है. सरकारी दफ्तरो में भी चुस्ती आई है और अब सरकारी कर्मचारी रिश्वत मांगते-लेते हिचकता और ठिठकता है.

बीजेपी मोदी की लहर में पूरे प्रचंड बहुमत से देश में सत्ता पाने में कामयाब रही लेकिन देश की राजधानी दिल्ली के चुनावी अखाड़े में बुरी तरह से पस्त हुई. दिल्ली की 70 सीटो में से 67 सीटे जीतकर आम आदमी पार्टी सत्ता में तो आ गई है लेकिन केन्द्र की मोदी सरकार के साथ पिछले 2 साल से उसका शह और मात का खेल जारी है. प्रधानमंत्री मोदी पर आज सबसे जोरदार हमले केजरीवाल की तरफ से ही होते है.

दिल्ली में असल में आप को इतनी बड़ी जीत अपनी खूबियों से नहीं बल्कि बीजेपी की खामी और खोट से ज्यादा मिली है. 70 विधानसभा सीटों वाली दिल्ली में बीजेपी की सबसे शर्मनाक हार के ये रहे 70 कारण.

1. बीजेपी नेताओं का अरविंद को संबोधन में केजरीवाल “जी” कहकर उनका कद बढ़ाना
2. केजरीवाल के खिलाफ नई दिल्ली सीट से कमजोर उम्मीदवार उतारना
3. ईमानदार छवि के केजरीवाल को झूठा बताकर निजी हमले करना 
4. आईआईटी और आईआरएस केजरीवाल की तुलना ड्राइवर से करना
5. केजरीवाल की उपलब्धियों को भगोड़ा बताकर पलायन से जोड़ना
6. केजरीवाल की तुलना नक्सलियों से करना
7. दिल्ली की ताकत आप पार्टी को एनजीओं बताना
8. आप के प्रचार पर सवाल उठाकर खुद करोड़ो खर्च करना
9. आप के पारदर्शी चंदे और जनता के पैसे पर सवाल उठाना
10. बीजेपी में दिल्ली के लिए असरदार नेता, नीयत और नारे का अभाव
11. आप को कमजोर करने के लिए चुनाव बार-बार टालना
12. आप के विधायको की जोड़-तोड़ की कोशिश करना
13. चुनाव टालकर आप को अतिरक्त समय देना
14. चुनाव टालकर मोदी लहर को समय पर नही भुनाना
15. दिल्ली के त्रिलोकपुरी दंगे का विपरित असर होना
16. दिल्ली में गैंगरेप और बलात्कार का ना रुकना
17. दिल्ली में झुग्गी बस्तियों का टूटना
18. बीजेपी का अपने उम्मीदवार देर से चुनना
19. बीजेपी का प्रचार देर से शुरु करना
20. बीजेपी का घोषणापत्र घोषित ना करना
21. बीजेपी के पहले ही असरदार विज्ञापन में अन्ना की फोटो पर माला/मृतक विवाद
22. बीजेपी के दूसरे विज्ञापन में “उपद्रवी गोत्र” विवाद का अग्रवाल समाज से जुड़ना
23. विजन डॉक्यूमेंट में उत्तर पूर्व को लोगो को इमिग्रेंट प्रवासी बताना
24. केजरीवाल, आशुतोष और गोत्र विवाद से वैश्य समाज में जनाधार घटना
25. गणतंत्र दिवस समारोह का केजरीवाल को न्योता ना देना, और विज्ञापन में कार्टून से इसका मजाक भी उड़ाना
26.दिल्ली संगठन की गुटबाजी और सर्वमान्य नेता का ना होना
27. दिल्ली में 16 सत्ता से दूर रहने पर भी संगठन को मजबूत ना करना
28. हर्षवर्धन को चुनाव ना लड़ाना
29. प्रदेश अध्यक्ष सतीश उपाध्याय को टिकट ना देना
30. दूसरे बड़े चेहरों को चुनाव ना लड़ाना
31. टिकट कटने पर पार्टी दफ्तर के बाहर प्रदर्शन होना
32. सतीश उपाध्याय और आशीष सूद पर बिजली कपंनियो से सांठगांठ के आरोप लगना
33. मुख्यमंत्री की बाहरी उम्मीदवार किरण बेदी को लाना
34. किरण बेदी के अपरिपक्व नेतृत्व को फ्री हैंड देना
35. प्रदेश बीजेपी नेताओं का असंतोष और असहयोग

36.  नेताओं का कद घटने से कार्यकर्ताओं का ठंडा पड़ा जोश
37.  अमित शाह का मीडिया में अपने कार्यकर्ताओं को आलसी बताना
38. किरण बेदी के प्रचार प्रभारी टंडन का रुठकर इस्तीफा देना.
39. मनोज तिवारी का किरण बेदी को थानेदार बताना
40. किरण बेदी का दिल्ली के सांसदो को पार्टी ऑफिस नहीं बल्कि अपने घर पर बुलाना
41. हर्षवर्धन के घर पहुंचने से पहले किरण बेदी का निकल जाना
42. किरण का केजरीवाल की खुली बहस की चुनौती से बचना
43. किरणबेदी के खिलाफ अतीत के लाठीचार्ज के लिए वकीलो का प्रदर्शन करना
44. किरण का सरदार पटेल की मूर्ति के गले में बीजेपी का पटका डालना 
45. बीजेपी का बाहरी सांसदो और मंत्रियो को प्रचार में उतारना
46. बीजेपी सांसदो का उटपटांग और विवादित बयान देना
47. बीजेपी के चुनाव प्रचार में अखड़ता और अंहकार का पुट होना
48. प्रचार के दौरान आप के कार्यकर्ताओं से मारपीट करना
49. संगम विहार में आप के उम्मीदवार की गाड़ी का जलना
50. लाठी-डंडो से हिंसा के बावजूद अपने सांसद रमेश विधूड़ी का समर्थन करना
51. दिल्ली में मोदी का आधा-अधूरा प्रचार और कम रैलियां
52. मोदी की रैली में सभी के लिए कुर्सी लगाकर अमीरी का प्रदर्शन
53. धर्मिक उन्माद और घर-वापसी पर मोदी का खुलकर कुछ ना कहना
54. बिजली, पानी, सुरक्षा के बजाए स्मार्ट सिटी के हवाई वादे करना
55. पेट्रोल-डीजल के दाम देर से कम करना
56. पेट्रोल-डीजल के दाम किश्तो में कम करना
57. ओबामा से मुलाकात के वक्त मोदी के 10 लाख के कोट का मुद्दा बनना
58. कालाधन वापस लाने पर पलटी मारना
59. कालेधन की वापसी से 15 लाख रुपए मिलने को चुनावी मुहावरा बताना
60. मुफ्त बिजली, पानी का आप का लुभावना प्रचार
61. बाहरी दिल्ली के ग्रामीण इलाकों में आप की पैंठ बढ़ना
62. निम्न मध्यम वर्ग का आप से अपनापन
63. उच्च शिक्षित वर्ग का भी आप को समर्थन
64. देश बदलने के इच्छुक एनआरआई का खुलेदिल से आप को चंदा
65. भ्रष्टाचार के खिलाफ जागरुक हुआ युवा वर्ग
66. मंहगाई की चुभन झेलते वाले मध्यम वर्ग का भी आप को समर्थन
67. दिल्ली के शाही इमाम का आप को समर्थन, और मुस्लिमो में आप की लोकप्रियता
68. डेरा सच्चा सौदा के बीजेपी को समर्थन के ऐलान से नाराज सिख 
69. मोदी लहर में बीजेपी के सांसद बने अपरिपक्व और गैरअसरदार नेताओं का निकम्मापन
70. आप का जनता से जुड़ने और जनता को अपने साथ जोड़ने का हुनर. 

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