चुनाव आयोग ने मांगे अदालतों जैसे अधिकार

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भारतीय चुनाव आयोग ने खुद पर आपत्तिजनक और पक्षपातपूर्ण टिप्पणी किए जाने पर अवमानना के मामले में कार्यवाई करने का अधिकार केंद्र सरकार से मांगा है. आयोग ने सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट और अन्य न्यायालयों को मिलने वाले इस अधिकार के तर्ज पर खुद को भी ऐसे ही अधिकार देने की मांग की है. इसके लिए चुनाव आयोग ने केंद्र कानून मंत्रालय को पत्र लिया है.

पिछले कुछ चुनावों में विपक्ष की हार के बाद विपक्षी पार्टियों ने चुनाव आयोग पर पक्षपात करने और मशीनों के साथ छेड़छाड़ करने जैसे आरोप लगाए थे. आम आदमी पार्टी ने तो चुनाव आयोग को धृतराष्ट्र तक कह दिया था.

चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है, जिसे संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत बनाया गया है. चुनाव आयोग का कार्य चुनाव कराना, चुनाव सुधार करना, राज्यों में चुनाव कराना, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनाव कराना आदि शामिल है. आपको बता दे, संविधान सिर्फ न्यायपालिका को ही अवमानना करने वाले पर कार्यवाई करने का अधिकार देता है. अनुच्छेद 129 और अनुच्छेद 215 सुप्रीम कोर्ट और हाईकार्ट को अवमानना के खिलाफ कार्यवाई करने का अधिकार देता है. साथ ही इन दोनो न्यायालयों को पास निचली अदालतों की अवमानना करने वाले के खिलाफ भी कार्यवाई करने का अधिकार है.

अपनी आलोचना और निर्वाचन प्रक्रिया पर बार-बार उंगली उठने के बाद चुनाय आयोग ने राजनीतिक दलो से विचार विमर्श करने के बजाए अदालतो जैसे अधिकार की ईच्छा जताकर नया विवाद छेड़ दिया है.

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