गांधी पर नस्लभेद के आरोप लगने पर उनकी मूर्ति विश्वविद्यालय से हटाएगा घाना !

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 हात्मा गांधी पर नस्लभेद के आरोप लगने के बाद घाना की सरकार गांधी की मूर्ति को विश्वविद्यालय से हटाने को मजबूर हो गई है. राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने इसी साल जून में महात्मा गांधी की मूर्ति का विश्वविद्यालय में अनावरण किया था. गांधी की मूर्ति को हटाने के लिए वहां के प्रोफेसरो ने मुहिम छेड़ी हुई है इनका कहना है कि महात्मा गांधी ने अपने पुराने लेखो में अफ्रीकियो को असभ्य काला लिखा है.

मूर्ति हटाने के हिमायती ओबाडेले कामबोन का कहना है कि मूर्ति को दूसरी जगह लगाना नाकाफी होगा. मूर्ति को भारत वापस भेज देना चाहिए क्योकि घाना में कहीं भी लोग इसका स्वागत नहीं करेंगे. गांधी की मूर्ति की जगह स्थानीय क्रांतिकारी की मूर्ति लगाई जाए.

घाना के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कहा है कि, “गांघी की मूर्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उसे घाना विश्वविद्यालय के परिसर से हटा कर दूसरी जगह लगाया जाएगा”

घाना ने अपने बयान में कहां है कि, “गांधी की मूर्ति के विरोध से भारत से रिश्तो को हानि हो सकती है. गांधी ने पूरी दुनिया में नागरिक अधिकारो और आजादी के आंदोलनो को प्रेरित किया. मनुष्य के नाते सभी में कुछ खामियो हो सकती है लेकिन सब वक्त के साथ विकसित हो जाते है.”

गांधी ने बतौर वकील दक्षिण अफ्रीका की 1893 में यात्रा की थी. वहां करीब 20 साल तक उन्होने भारतीयो के अधिकारो के लिए संघर्ष किया. गांधी के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले उस वक्त की गांधी के लेखो को हवाला देकर जता रहे है कि गांधी ने उन्हे असभ्य काला कहा था.

उसी दौरान गांधी ने दक्षिण अफ्रीका की रंगभेद करने वाली सरकार के खिलाफ प्रभावी अहिंसक आंदोलन किया था.

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