क्यों लगा गूगल पर 7,100 करोड़ रुपये का जुर्माना?

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यूरोपियन यूनियन ने गूगल पर इंटरनेट सर्च करने को लेकर दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए 120 करोड़ डॉलर यानी करीब 7,100 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है. गूगल से जुड़ा यह मामला 2010 का है. इस मामले ने तब ज्यादा तूल पकड़ लिया जब अन्य प्राइज-कंपैरिजन वेबसाइट्स ने शिकायतें करते हुए कहा कि गूगल ने अपने सर्च रिजल्ट से उनकी सेवाएं हटा दी हैं. गूगल का यूरोप में इंटरनेट सर्च पर 90 फीसदी का शेयर है. इससे गूगल को यह पावर मिल जाती है कि वो जहां चाहे यूजर्स को उस तरफ भेज सकता है.

इतने बड़े जुर्माने की राशि अब गूगल को 90 दिनों के अंदर जमा करनी होगी. आरोप है कि गूगल ने अपने उत्पादों को बेचने के लिए सर्च इंजन में गड़बड़ी की. सर्च इंजन की एल्गोरिथम में छेड़छाड़ की. जिसके चलते यूजर्स को फेयर प्रोडक्ट्स की जानकारी नहीं मिल सकी. इसके कारण बड़ी कंपनियों को अनुचित नुकसान हुआ. जैसे ही यूजर गूगल पर कोई प्रोडक्ट की जानकारी के लिए सर्च करता तो उसी से संबंधित गूगल का प्रोडक्ट सर्च इंजन में सबसे ऊपर दिखाई देता.

वैसे देखा जाए तो गूगल के लिए यह कोई ज्यादा जुर्माना नहीं है. 2.7 बिलियन डॉलर का यह जुर्माना गूगल आसानी से भर सकता है क्योंकि गूगल की मूल कंपनी अल्फाबेट का सालाना मुनाफा 55 बिलियन डॉलर का है.

आपको बता दे, गूगल की मूल कंपनी अल्फाबेट पर पिछले साल 90 अरब डॉलर का जुर्माना लगाया गया था, जो गूगल के खरीदारी राजस्व का 30 फीसदी जुर्माना माना गया.

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