‘एलन’ और ‘शोहयेत’, दो तस्वीरो की एक ही कहानी!

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पको तीन साल के एलन कुर्दी की वो तस्वीर तो याद ही होगी, जिसमें कुर्दी समुद्र किनारे उल्टे पड़े थे. इस तस्वीर ने सीरियाई संकट की ओर पूरी दुनिया का ध्यान खींच दिया. हर कोई यूरोप में सीरियाई शरणार्थियो के लिए दरवाजे खोलने की बात करने लगा. यूरोप ने मानवता के आधार पर आखिरकार सीरिया और लीबिया जैसे आतंकग्रस्त देश के आम लोगो के लिए अपने दरवाजे खोल दिए. द्वितीय विश्व युद्ध के बाद 21वीं सदी अब तक की सबसे बड़ी शरणार्थी समस्या से जूझ रही है.

आज कल एलन कुर्दी की तरह ही एक और बच्चे की तस्वीर खूब वाइरल हो रही है. इस तस्वीर में भी यह बच्चा एलन की तरह उल्टा जमीं पर पड़ा है. लेकिन इस बार देश अलग है. यह तस्वीर 16 महीने के मोहम्मद शोहयेत की है. और वो बस इस तरह इसलिए पड़ा है क्योंकि उसका दोष सिर्फ यह था कि वह एक रोहिंग्या मुस्लिम है. 16 महीने के मृत शोहयेत के शव की इस तस्वीर ने फिर दुनिया का ध्यान उस ओर खीचा है जहां सत्ता संघर्ष में सिर्फ बच्चे ही कुचले जाते रहे है. शोहयेत की यह तस्वीर म्यांमार और बांग्लादेश की सीमा से आई है.

आपको बता दे, रोहिंग्या मुसलमान म्यांमार में रह रही मुसलिम आबादी है. लेकिन संख्या में कम होने के कारण उनका दमन किया जाता रहा है. बौद्ध धर्म को अपनाने वाला यह देश इन अल्पसंख्यक मुस्लिमों पर अत्याचार करता रहा है. इन दिनों म्यांमार में बसे रोहिंग्या मुसलमानों पर आफत आई हुई है और इसी आफत से बचने के लिए मोहम्मद शोहयेत के माता-पिता अपना घर छोड़कर बांग्‍लादेश जा रहे थे. बांग्लादेश-म्यांमार बॉर्डर पर बहने वाली नाफ नदी के सहारे वह बांग्लादेश पहुंचने की कोशिश कर रहे थे. इसी कोशिश में मोहम्मद की मौत हो गई. आपको बता दे कुर्दी का परिवार भी इसी तरह समुद्र पार कर नए आशियाने की तलाश में जा रहा था लेकिन समुद्र की तेज लहरो ने कुर्दी को समुद्र के किनारे कर दिया.

आपको बता दे, रोहिंग्या मुसलमानों को म्यांमार में कोई अधिकार नहीं दिए गए है. उन्हें म्यांमार का नागरिक नहीं समझा जाता. और उन्हें देश से निकल जाने की धमकियां दी जाती है. आरोप लगते रहे है कि नोबल पुरस्कार जीत चुकी आंन सान सू की भी म्यांमार की सबसे बड़ी नेता होने के बाद भी इनके लिए कुछ नहीं कर रही है.

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