इन महिला खिलाड़ियों ने भारतीयों को बार बार गर्व करने का मौका दिया

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भारतीय महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं है इसका अहसास पूरे विश्व को हो चुका है. रियो ओलंपिक में जब भारत को एक भी मैडल नहीं मिल पा रहा था ऐसे में भारतीय महिलाओं ने ही भारत को दो मैडल जीताए. खेल जगत से जुड़ी इन महिला खिलाड़ियों को आज की युवा लड़की अपना प्रेरणास्त्रोत मानती है.

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दीपा करमाकर- जो काम दुनिया को नामुमकिन लगे, वही मौका होता है करतब दिखाने का. दीपा करमाकर ने उस खेल में उपलब्धि हासिल की जिस खेल को भारत में सर्कस ही समझा जाता रहा.

दीपा रियो ओलंपिक के वोल्ट इवेंट में मैडल तो नहीं जीत पाई लेकिन भारतीय लोगो का दिल जरूर जीता. दीपा को रियो ओलंपिक में शानदार प्रदर्शन करने के बाद देश में एक विजेता की तरह सम्मान मिला. सचिन तेंडुलकर ने दीपा को बीएमडब्ल्यू कार भी गिफ्ट की थी.

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पी.वी. सिंघु- कामयाबी के पीछे मत भागो, काबिल बनो, कामयाबी तुम्हारे पीछे झक मार कर आएगी. सिंघु ने रियो ओलंपिक के बैडमिंटन मुकाबले में सिल्वर मैडल अपने नाम किया. सिंघु फाइनल मुकाबले में चूक गई लेकिन अपने अद्भुत खेल से दुनिया का दिल जीत लिया.

साइना नहवाल के बाद भारतीय बैडमिंटन में एक और सितारा चमककर सामने आया. साइना नहवाल ने लंदन ओलंपिक में भारत को कांस्य पदक दिलाया वहीं सिंघु ने साइना के अधुरे काम को पूरा करते हुए रियो ओलंपिक में चांदी पर कब्जा किया.

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साक्षी मलिक- जब रियो ओलंपिक में ऐसा लग रहा था कि भारत खाली हाथ इस ओलंपिक में रह जाएगा. ऐसे में साक्षी मलिक ने भारत की झोली में कांस्य पदक डाल दिया. और देश को एक नया नारा दिया बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओं और बेटी खिलाओ.

साक्षी ने ऐसे वक्त कुश्ती में भारत को मैडल दिलाया जब भारतीय पुरुष कुश्ती के बड़े बड़े नाम रियो ओलंपिक में कुछ खास नहीं कर सके. गीता और बबिता फोगाट के बाद साक्षी के रूप में भारतीय महिला कुश्ती को एक नया सितारा मिल गया.

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सानिया मिर्जा को कौन नहीं पहचानता. डबल्स में दुनिया की चैंपियन खिलाड़ी सानिया मिर्जा पहली ऐसी महिला खिलाड़ी हैं जिन्होंने टेनिस मे भारत का नाम रोशन किया. आज भी सानिया मिर्जा का दबदबा टेनिस के डबल्स मुकाबलों में रहता है.

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दीपा मलिक- देश की पहली बेटी बन गई है जिन्होंने पैरालंपिक के गोला फेंक इवेंट में सिल्वर मैडल जीता. एफ 53 इवेंट में दीपा ने भारत को सिल्वर मैडल जीताया था. दीपा ने 4.76 मीटर की दूरी तक गोला फेंका था. कुर्सी पर बैठकर दीपा ने वो सब हासिल किया जो एक सामान्य व्यक्ति भी नहीं कर पाता.

आपको बता दे, दीपा के निचले हिस्से में लकवा पड़ जाने से आधा शरीर सुन्न हो गया था. दीपा की कमर के नीचे का सारा हिस्सा लकवे का शिकार हो चुका था. 1999 में रीढ़ की हड्डी में ट्यूमर के चलते लकवा हुआ. ट्यूमर ठीक करने के लिए दीपा की तीन सर्जरी हुई थी. दीपा ने अपनी इस कमी को अपनी कामयाबी के सामने नहीं आने दिया. दीपा ने अपने जज्बे और हौसले से एक इतिहास लिखा है.

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मिताली राज, भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान. मिताली राज ने 18 साल के अपने शानदार करियर में 188 वनडे खेले और सबसे तेज 6,000 रन बनाकर विश्व रिकॉर्ड अपने नाम किया. मिताली ने पुरुष क्रिकेटरों से भी तेज 6,000 रन पूरे किए है.

मिताली राज ने 18 वर्ष के अपने करियर में सिर्फ 188 वनडे मैच खेले. ऐसे में अगर पुरुष क्रिकेट की तरह ही महिला क्रिकेट में ज्यादा मैचो का आयोजन होता तो मिताली राज को महिला क्रिकेट का भगवान बनने से कोई नहीं रोक सकता था. आपको बता दे, मिताली राज ने अपने तीसरे टेस्ट मैच में ही एक रिकॉर्ड को अपने नाम कर लिया था. मिताली ने अपने तीसरे ही टेस्ट में (इंग्लैंड के खिलाफ) 209 रन के व्यक्तिगत रिकॉर्ड को तोड़कर 214 रनों की पारी खेल डाली थी. हालांकि अब यह रिकॉर्ड भी टूट चुका है और पाकिस्तान की किरण बालूच के नाम 242 रनों की निजी पारी का व्यक्तिगत रिकॉर्ड है.

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अरूणिमा सिन्हा ने एक पैर से वो सब कर दिखाया जो कोई सोच भी नहीं सकता. इस पूर्व वॉलीबॉल खिलाड़ी ने अपने एक पैर खोने के बाद भी हार नहीं मानी और माउंड एवरेस्ट पर एक पैर से चढ़ाई की. अरुणिमा माउंट एवरेस्ट फतह करने वाली पहली भारतीय विकलांग महिला बनीं.

आपको बता दे, 12 अप्रैल 2011 को लखनऊ से दिल्ली जाते समय अरुणिमा के बैग और सोने की चेन खींचने के प्रयास में कुछ अपराधियों ने बरेली के निकट पदमवाती एक्सप्रेस से अरुणिमा को बाहर फेंक दिया था, जिसके कारण वह अपना एक पैर गंवा बैठी थी.

Mary Kom

मणिपुर की इस भारतीय महिला बॉक्सर ने पांच बार वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप को अपने नाम किया. और वह पहली ऐसी महिला बॉक्सर है जिन्होंने लगातार छह वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप में छह मैडल अपने नाम किए.

मैरी कॉम ने लंदन ओलंपिक में भारत को कांस्य पदक भी जिताया. मैरी कॉम अभी राज्यसभा की मनोनित सदस्य भी है.

P.T.Usha

पी.टी ऊषा अब तक की सबसे तेज भारतीय महिला धावक है. वह केरल के पय्योली गांव की थी इसलिए उन्हें प्यार से पय्योली एक्सप्रेस भी कहा जाने लगा था.

1980 के मॉस्को ओलंपिक में ऊषा ने सबसे कम उम्र में भाग लेकर भारत का नाम रोशन किया. ऊषा ने चार ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया. पी.टी. ऊषा को 1984 में अर्जुन अवॉर्ड और पद्म श्री से सम्मानित किया गया था.

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