केजरीवाल सरकार सबसे भ्रष्ट, जनता को ठगा और पैसे को लूटा- विजेन्द्र गुप्ता

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दिल्ली विधानसभा में नेता विपक्ष और बीजेपी के विधायक विजेन्द्र गुप्ता ने केजरीवाल सरकार पर दिल्ली की जनता को ठगने और लूटने का आरोप लगाया है. विजेन्द्र गुप्ता के मुताबिक जो पार्टी भ्रष्टाचार को दूर करने और सादगी का वादा कर सत्ता में आई वो अब खुद भ्रष्टाचार में लिप्त होकर जनता के पैसे को लूट और लूटा रही है. केजरीवाल अपने झूठ को छुपाने के लिए राम जेठमलानी जैसे वकील को सरकारी खजाने से हर पेशी पर 22 लाख रुपये देने को तैयार हो गए और अपनी पार्टी के प्रचार पर जनता के 97 करोड़ रुपए लूटा दिए. विजेन्द्र सिंह ने कहा है कि  केन्द्र की मोदी सरकार ने सदैव हर राज्य के साथ समान व्यवहार किया और समान सम्मान दिया लेकिन केजरीवाल सरकार इकलौती है जो केन्द्र से टकराने के लिए अड़ियल रुख अपनाती है. आरोपो की राजनीति करती है और ऐसा लगता है ये सरकार चलाना ही नहीं चाहते है. टीएनआई ने दिल्ली में एमसीडी चुनावो में बीजेपी की आप पार्टी से टक्कर और पार्टी की कांग्रेस से निबटने की रणनीति और तैयारी पर विजेन्द्र गुप्ता के साथ की एक विशेष बातचीत.

“जिस पार्टी की अंदर हर तरह का भ्रष्टाचार हो, आपराधिक प्रवृत्ति के लोग हो, नकली डिग्री बनाने वाले मंत्री हो, महिलाओं का शोषण करने वाले मंत्री हो, महिलाओं की सुरक्षा की बात करके जो लोग सत्ता में आए थे और उनके घर में ही महिलाओं का उत्पीड़न हो रहा है. डोमेस्टिक वायलेंस हो रही है. दो साल पहले 67 सीटे जीतकर जब आए थे तो लोगो को बड़ी उम्मीदें थी. लेकिन 2 साल के क्रियाकलापो में ये देखा कि सरकार का कोई दृष्टिकोण जनता के काम करने का नहीं है. सिर्फ राजनीतिक रोटियां सेंकना, राजनीति विवाद खड़े करना और गरीब जनता के कंधे को बंदूक चलाने के लिए इस्तेमाल किया गया है.”

प्रश्न: बीजेपी ने 70 में से सिर्फ 3 सीटे जीती अब एमसीडी चुनाव में पार्टी 272 सीटो मे से कितनी जीतेगी?

उत्तर: भारतीय जनता पार्टी को 3 सीटे मिली या हमने लोकसभा की सभी 7 सीटे जीती. वास्तविकता तो ये है कि जब हमने 3 सीटे जीती थी तब भी हमारा वोट प्रतिशत 33 प्रतिशत रहा. अाम आदमी ने लछ्देदार बाते करके दिल्ली में अपना प्रभाव बढ़ाया था लेकिन आज आम आदमी पार्टी का सच लोगो के सामने आ गया है. लोग अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रहे है. लोग उनका भ्रष्टाचार देख रहे है. उनके नेताओं के आपराधिक मामले सामने आ रहे है और जिस तरह से जनता के पैसे की लूट हो रही है. लोगो को सामूहिक रुप से समझ में आ गया है.

रामजेठमलानी जी के मामले में देखे. सरकारी खजाने से खर्च करने के लिए, अभी तो ये पहली बिल है जो करीब 4 करोड़ रुपए है. आम आदमी पार्टी इस बात का जवाब नहीं देती है कि अरुण जेटली जी ने जो 10 करोड़ का केस किया है, केस हारने पर क्या 10 करोड़ रुपये भी सरकारी खजाने से दिया जाएगा. तो उसका तो मतलब साफ है आज आप 4 करोड़ दे रहे है कल को आप कहेंगे की 10 करोड़ सरकार देगी. क्योकि जब वकीलो की फीस सरकारी खजाने से जाएगी तो जो पैनल्टी पड़ेगी वो भी सरकार के खजाने से जाएगी. तो कहने का मतलब है कि कहीं ना कहीं पद का दुरुपयोग हो रहा है और सत्ता का दुरुपयोग हो रहा है. और 97 करोड़ के प्रचार के मामले में आप देखें सुप्रीम कोर्ट की डायरेक्शन है. कोर्ट कह रहा है जिसके अनुसार उन्होने अपनी पार्टी का प्रचार किया है. अपनी पार्टी को लाभ पहुंचाने के लिए सरकारी धन का दुरुपयोग किया है जो विज्ञापन दिए गए. तो ये सिध्द हो गया और इसीलिए तो 97 करोड़ रुपये सरकारी खजाने में जमा करने के आदेश जारी हो गए.

प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रुप से देश के सर्वोच्च न्यायालय की डायरेक्शन के बाद इस तरह की स्थिति आई है. तो फिर क्या माना जाए जिस पार्टी की अंदर हर तरह का भ्रष्टाचार हो, आपराधिक प्रवृत्ति के लोग हो, नकली डिग्री बनाने वाले मंत्री हो, महिलाओं का शोषण करने वाले मंत्री हो, महिलाओं की सुरक्षा की बात करके जो लोग सत्ता में आए थे और उनके घर में ही महिलाओं का उत्पीड़न हो रहा है. डोमेस्टिक वायलेंस हो रही है. रमेश कुमार, सोमनाथ भारती जैसे आधा दर्जन विधायक पर ऐसे मामले है. सच सामने आया है तो सारी परिस्थितियां यही बयान करती है कि दो साल पहले 67 सीटे जीतकर जब आए थे तो लोगो को बड़ी उम्मीदें थी. लेकिन 2 साल के क्रियाकलापो में ये देखा कि सरकार का कोई दृष्टिकोण जनता के काम करने का नहीं है. सिर्फ राजनीतिक रोटियां सेंकना, राजनीति विवाद खड़े करना और गरीब जनता के कंधे को बंदूक चलाने के लिए इस्तेमाल किया गया है.

प्रश्न: लेकिन यही आरोप आप सरकार आप पर भी लगाती है. उनका कहना है कि हमने भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान छेड़ा और जेटली की डीडीसीए का विवाद है तो फीस विवाद ले आए. जनता को राहत देना चाहते है तो फाइले अटका दी जाती है.

उत्तर: पहली बात तो मैं ये कहूंगा कि ये डीडीसीए के मामले में झूठ बोल रहे है गुमराह कर रहे है. इनके खुद के अफसर जिसको डीडीसीए की जांच का अध्यक्ष बनाया उसने खुद लिखकर कहा कि मुझसे जबरदस्ती की जा रही थी कि बिना किसी फैक्ट्स के इसमें अरुण जेटली जी का नाम लो. जो लोग जांच को प्रभावित कर रहे हो. सरकार खुद ये कर रही हो और जांच रिपोर्ट आने से पहले ही. आप राजनीतिक दृष्टिकोण से आरोप लगा रहे है और इस कारण आपको मुकदमो में फंसना पड़ा है तो इससे तो साफ होता है कि जब फैसला आपने पहले ही ले लिया तो आपका जांच में तो कोई इंटरेस्ट नहीं है. ना भ्रष्टाचार को समझने में, आपका तो लोगो पर कीचड़ उछालने में. और तभी आप रामजेठमलानी जैसे बड़े वकील..नहीं तो अगर आप सच्चे है. जब आप सरकार में नहीं आए थे तो तब तो आप अपने को बहुत सच्चा बता रहे थे. लेकिन अब आप खुद झूठा साबित हो रहे है तो आप सोच रहे है कि बड़े-बड़े वकील करके वो मुझे बचा ले. 22 लाख रुपया एक हियरिंग पर जो सादगी की बात करते थे आज इनके मंत्री फर्स्ट क्लास में ट्रैवल कर रहे हैं हवाई जहाज में ये कहकर की हमारा अधिकार है जबकि अधिकार नहीं है. यानी जो प्लेन की टिकट 25 हजार रुपये में आती है वो सरकारी खजाने से साढ़े 6 लाख की खरीद रहे है. इसको क्या माना जाए? सादगी की बात करने वाले लोग, गरीब की वकालत करने वाले लोग आज 22 लाख रुपये अपने लिए प्रति हियरिंग पर यूज कर रहे है.

प्रश्न: उनकी दलील है कि हमने भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई लेकिन हमारे उपर ही मानहानि का मुकदमा कर दिया गया और यहीं आरोप बीजेपी के घर में कीर्ति आजाद ने भी लगाए थे.

उत्तर: सवाल आरोपो का नहीं है. सरकार तथ्यो पर चलती है. फैक्टस पर चलती है. आज तक आप एक भी तथ्य नहीं दे पाए. अगर आप अपनी जगह सही थे तो फिर पटियाला हाउस कोर्ट में इस मुकदमे को रद्द करवाने के लिए कितने पापड़ बेले.? सारी दुनिया जानती है. कभी आप हाई कोर्ट भाग रहे थे कहीं चार्जशीट दाखिल ना हो जाए. सिर्फ मुकदमा रुकवाने की कोशिश, मुकदमा फेस क्यों नहीं कर रहे थे आप? आपके पास तो मौका था. अगर आप सही थे तो अदालत में तो एक भी तथ्य नहीं रख रहे आप. अदालत में तो आप एक बार भी ये जाकर नहीं कह रहे है कि हां हमारे पास सबूत है. वहां तो आप मुकदमे से डर रहे है. भाग रहे है. कभी आप सुप्रीम कोर्ट जा रहे है. कभी आप हाई कोर्ट जा रहे है. डेट बढ़वा रहे है. तारीख पर तारीख ले रहे है. उसमें किसी भी तरह से आपको समय मिल जाए मुकदमा लंबा चला जाए. फिर आप जेठमलानी को ला रहे है. उनको आप बड़ी-बड़ी भारी फीस दे रहे है. तो ये सच्चे लोगो की बात है?. इसका मतलब है कि सच तो कहीं है ही नहीं. झूठ की बिसात पर आपने जो शतरंज बिछाई है उसकी जाल में आप खुद फंस गए.

प्रश्न: लेकिन कानूनी विकल्प के तौर पर अगर मुकदमा केजरीवाल पर होता है तो ये उनका कानूनी अधिकार है कि वो अपना वकील करे और कार्ट से अपील भी करें कि हमें माफ कर दिया जाए.?

उत्तर: करें, कहे हमने झूठ बोला था. हमे माफ कर दिया जाए. हमने गलत आरोप लगाए थे. कोई भ्रष्टाचार अरुण जेटली जी ने नहीं किया. आज तो आप भ्रष्टाचार कह रहे है. देखो जी मैने भ्रष्टाचार बताया लेकिन क्या उजागर किया है ये आजतक किसी को समझ में ही नहीं आया. जो आपने उजागर किया उसे अदालत में क्यों नहीं बताते आप? अदालत में तो आप डरकर पीछे खड़े हो जाते हो कि जेठमलानी जी मुझे बचा लो, मुझे बचा लो.

प्रश्न: लेकिन उनके वकील जेठमलानी का भी कहना है कि जेटली जी का भ्रष्टाचार है और उनके लिए मैं फ्री में ही मुकदमा लड़ूंगा?

उत्तर: ये तो अब कह रहे है. हमें तो यहां तक खबर है कि जेठमलानी जी ने पहले कहा कि मैं फ्री में मुकदमा लड़ूंगा. तो ये बिल कहां से आ गया बीच में. मैने तो कहा था कि फ्री में मुकदमा लड़ूंगा तो फिर ये जबरदस्ती पेमेंट क्यों हो रही थी? क्या पेमेंट में भी कोई घालमेल है.? शक की सुंई तो उधर भी जाती है. जब वकील कह रहे है कि मुझे फीस नहीं चाहिए और आप कह रहे है 22 लाख रुपए प्रति हियरिंग आप लो. जब भी आप अदालत आएंगे हम 22 लाख रुपये का चैक आपके लिए लेकर आएंगे. 22 लाख एक हियरिंग पर अगर 4 हियरिंग हो गई तो 1 करोड़ रुपये का चैक सरकारी खजाने से बनवाकर जेब में रखकर ले जाना चाहते हो. ये कौन सी सादगी है.?

प्रश्न: उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया का कहना है कि टाइमिंग को देखिए जब ईवीएम के नतीजो को लेकर विवाद हो रहा है तो ध्यान भटकाने के लिए ये चीजे कही जा रही है. मुकदमा तो सरकार का है.?

उत्तर: टाइमिंग तो वो ठीक थी जब पंजाब में चुनाव था. हमने तो मिड दिसम्बर में.. जेठमलानी जी का बिल. 20 दिसम्बर को जेठमलानी जी ने बिल भेजा. 4 फरवरी को चुनाव थे. उससे पहले उठता? मीडिया ने इस बात को एक्सपोज किया. मीडिया ने इस बात की जानकारी पूरे देश को दी है तो मीडिया को आपकी राजनीति से क्या लेना-देना.? मीडिया को आपकी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता से क्या लेना-देना.? मीडिया को क्या लेना-देना कि आप क्या मुद्दा उठा रहे है और कब उठा रहे है? तो अगर आप मीडिया को भी पार्टी मान रहे है तो फिर भगवान ही मालिक है.

प्रश्न: बीजेपी में बबाना से आप के विधायक वेद प्रकाश आए. कांग्रेस के अम्बरीश गौतम आए. क्या पार्टी में नेताओ की कमी है.? बाहरी का इतना सम्मान क्यों है?

उत्तर: देखिए, अच्छे लोग तो आएंगे तो बिल्कुल स्वाकीर करेंगे. ये तो उनको अपना घर संभाल के रखना है. बिना कंडीशन के वेद प्रकाश आए. वो तो सत्ता छोड़ कर ही आए. सरकारी सुविधाएं भी थी. चेयरमैन थे वो खादी के और बाकी बोर्डो के. गाड़ी, दफ्तर सब उनके पास उपलब्ध थे. मंत्री बनाने का लालच तक दिया गया उसके बाद भी अगर वो आम आदमी पार्टी की विधायिका को लात मारकर के और ये कहे कि मेरा दम घुट रहा था. क्योंकि हर बात में झूठ बोला जाता है. मक्कारी की जाती है. लोगो के काम नहीं करवाए जाते लोगो को गुमराह किया जाता है. ये वेद प्रकाश का पहला आरोप था कि इनका काम में कोई ध्यान नहीं है. लोगो को वादा करके आए थे लेकिन वादा पूरा करने में इनका कोई ध्यान नहीं जा रहा. लोग हमसे पूछते है लोगो को क्या जवाब दें? वेद प्रकाश का इस्तीफा. यें एक गंभीर मामला है. इससे मालूम पड़ता है कि ये पार्टी अंदर से खोखली हो चुकी है.

प्रश्न: ये तो पार्टी का अंदरुनी मामला भी हो सकता है. विधायक की व्यक्तिगत आकांक्षाए भी हो सकती है. उनसे पहले भी 4-5 विधायक बागी हो गए?

उत्तर: ये सबसे बड़ा उदाहरण है. लोग सत्ता लेने के लिए पार्टी में आते है. टिकट लेने के लिए पार्टी में आते है. मंत्री पद लेने के लिए पार्टी में आते है. पहला ऐसा मौका देखा गया है कि जिसके पास सत्ता है. और वो सत्ता को ठोकर मारकर उस पार्टी से बाहर जा रहा है. अगर वो भारतीय जनता पार्टी में आते और विधायक बने रहते तब आप ये कह सकते थे. लेकिन एक व्यक्ति जो जिसके पास तमाम सरकारी तंत्र है. वो सत्तारुढ़ दल से है. जिस पार्टी की सरकार है. और वो उस पार्टी को छोड़कर, पदो को छोड़कर चेयरमैनशिप छोड़कर. दलित कोटे से मंत्री बनाने के मुख्यमंत्री के प्रस्ताव को छोड़कर तो आप सोचिए. इस बात का आत्ममंथन तो दिल्ली का जनता को करना पड़ेगा. इस बात को समझना पड़ेगा. वेद प्रकाश पर आजतक कोई आरोप आम आदमी पार्टी नहीं लगा पाई. हर बात में बोलने वालो ने एक प्रैस कांफ्रेंस भी नहीं की. तीन दिन तक उनका इस्तीफा भी स्वीकार नहीं किया गया. इनको प्रलोभन दिए गए इसका मतलब इस पार्टी में ठीक नहीं है.

प्रश्न: आप पार्टी के विधायक ने पार्टी छोड़ी विधायकी छोड़ी लेकिन आपने अपनी पार्टी के पार्षदो को टिकट क्यों नहीं दिया? इसकी क्या व्यवस्था, नीति या गणित है?

उत्तर: भारतीय जनता पार्टी ने एक उदाहरण पेश किया है कि जरुरी नहीं कि जो लोग सत्ता में है. सरकार में है, चुनाव लड़ते है वो संगठन में काम नहीं कर सकते है? हमारे संगठन हो सरकार हो सबकी एक जिम्मेदारी है. और पार्टी ने जब सभी पार्षदो को ये फैसला सुनाया तो आपने देखा कि एक अनुशासन में रहने वालो लोगो की तरह पार्टी के सभी पार्षदो ने इसको माना. आज वो अपनी पार्टी के लिए लगे हुए है. अपनी जिम्मेदारियो में लगे हुए है. चुनाव लड़वा रहे है. चुनाव की प्रक्रिया में भाग ले रहे है तो ये आम आदमी पार्टी के लिए भी एक उदाहरण है. कांग्रेस के सामने भी एक उदाहरण है कि कोई पार्टी अगर एक संकल्प के साथ फैसला ले रही है. और पूरी पार्टी के एक सूत्र में बंधकर उस फैसले का स्वागत कर रही है. तो आज के समय में वेद प्रकाश जैसे लोगो को पार्टी में आना अति आवश्यक है.

प्रश्न: केन्द्रीय नेतृत्व को दिखाने के लिए कई बार कार्यकर्ता और नेता असंतुष्ट और रुष्ट होने के बाद भी अपनी सक्रियता दिखाते है. जताते है. यही गलती विधानसभा चुनावो के दौरान हुई नेतृत्व परिवर्तन हुआ. लेकिन जो गढ़ थे बड़े नेताओ के वहां भी पार्टी के उम्मीदवार हार गए. तो इतना आत्मविश्वास क्यों है कि जिनको टिकट नहीं मिला है वो भीतरघात नहीं करेंगे?

उत्तर: देखिए, जब ये फैसला हुआ तो कहा गया कि रिवोल्ट हो जाएगा. पार्षद नोमिनेशन भर देंगे, वो अपनी पार्टी बना लेंगे ऐसी भी अफवाह उड़ायी गई. लेकिन ये भारतीय जनता पार्टी के सिपाही है. जो व्यक्तिगत एजेंडे पर नहीं पार्टी के सामूहिक निर्णय पर विश्वास रखते है. और समर्पण भाव से राजनीति में त्याग की भावना से आए हुए है. पार्टी के जो संस्कार है विचारधारा है, वो दिखाते है कि अगर अनुशासन अगर किसी एक पार्टी में है तो उसका नाम है भारतीय जनता पार्टी.

प्रश्न: कुछ राजनीतिक विश्लेषको का मानना है कि सत्ता विरोधी लहर से बचने के लिए और फील्ड से जो नकारात्मक रिपोर्ट आ रही है उससे बचने के लिए पार्षदो को टिकट नहीं दिया गया?

उत्तर: ह..हह.. ये तो सब अपने-अपने तरीके से सोचेंगे. अपने-अपने व्यक्तिगत दृष्टिकोण को रखेंगे लेकिन वास्तविकता यहीं है कि भारतीय जनता पार्टी ने एक उदाहरण पेश किया, करके दिखाया. मै तो दूसरी पार्टियों के लिए कहूंगा कि आप थोड़ा सोचकर ही दिखा दो. विचार प्रकट करके ही दिखा दो. आपके यहां तो पार्टी में घमासान मचा हुआ है कांग्रेस के अंदर बड़े से बड़े नेता इस्तीफा दे रहे है वालिया, लवली शीला दीक्षित, हारुण यूसुफ सब मंत्री रहे है लंबे समय तक और आज वो पार्टी से असंतुष्ट है. एक तरफ तो एक पार्टी ऐसी है शीला दीक्षित है उनके पुत्र है सांसद है और सांसद है, मंत्री रहे हैं वो बड़े असंतुष्ट है और एक पार्टी भारतीय जनता पार्टी है जहां इतना सख्त फैसला लिया गया. उसके बाद भी पूरी की पूरी पार्टी एक सूत्र में आगे बढ़ रही है.

प्रश्न: ये सच तो आपका भी है कि आपने किसी बड़े नेता को देश की राजधानी होते हुए भी नेता को पनपने नहीं दिया. बढ़ने नहीं दिया. इतना जल्दी-जल्दी नेतृत्व पारिवर्तन. तो कहीं ना कही शीला दीक्षित भी 15 साल राज कर गई. उसके बाद केजरीवाल आ गए. केजरीवाल के खिलाफ चुनाव में भी बहुत कमजोर उम्मीदवार उतारा गया?

उत्तर: कुल मिलाकर भारतीय जनता पार्टी के नेता है श्री नरेन्द्र मोदी जी जिनका लोहा ना केवल देश ने बल्कि पूरे विश्व ने माना है. उनकी कर्मठता पर, उनकी सादगी पर, उनके विचारो से सब प्रभावित हुए है. हमारे पार्टी के अध्यक्ष श्री अमित शाह ने पार्टी को एकसूत्र में बांधने का काम किया है. और अमित शाह के कुशल नेतृत्व में ही. हम उत्तर प्रदेश में 325 सीटे जीतकर आए है. योगी जी जैसे हमारे पास तपस्वी है जो शासक होकर भी जनता के बीच में रहकर सेवा करने का काम कर रहे है. जनता का आशीर्वाद लेकर जनता का काम कर रहे है यानी कि उनका ना अपना कोई व्यक्तिगत हित, परिवार और एजेंडा है. चाहे वो नरेन्द्र मोदी जी हो, चाहे वे योगी जी हो उन्होने अपने को ना किसी परिवार से जोड़ा है ना वो किसी व्यक्तिगत भावना से गए है. तो हमें तो गर्व है अपने नेतृत्व पर और दिल्ली के अंदर कांग्रेस 15 साल तक शासन में रही और हमे उम्मीद है जब इस बार चुनाव होगा तब भारतीय जनता पार्टी अपना खोया हुआ गौरव फिर से प्राप्त करेगी. दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी का परचम फिर से लहराएगा और इसकी शुरुआत एमसीडी चुनाव से होगी. एमसीडी चुनाव को हम लॉचिंग पैड भी मान सकते है. ये चुनाव हमारे लिए एक तरह का टेकऑफ है. ये एक तरह का आगाज होगा. भारतीय जनता पार्टी इस तरह से आगे बढ़ेगी कि आम आदमी पार्टी का समाप्ति का दौर एक तरह से प्रारंभ हो गया है.

प्रश्न: एमसीडी चुनाव के लिए बीजेपी ने एक दर्जन से ज्यादा मंत्री और आधा दर्जन से ज्यादा मुख्यमंत्रियो को अपने स्टार प्रचारक बनाया है. क्या पार्टी को डर है कि बीजेपी का विजय-रथ केजरीवाल ने विधानसभा चुनाव में रोक दिया इस बार भी एमसीडी में बीजेपी का विजय-रथ रुक ना जाए?

उत्तर: देश के 15 राज्यों में या तो भाजपा की सरकार है. या भाजपा के मुख्यमंत्री है. देश में पूर्ण बहुमत की सरकार है. देश के हर कोने या जगह पर भारतीय जनता पार्टी की सरकार है. सही मायनो में जनता के लिए काम करने वाली जो पार्टी है वो भारतीय जनता पार्टी है. तीन साल में मोदी जी ने ऐसे उदाहरण पेश किए है कि गरीब अब मानकर चल रहा है कि हां मोदी जी मेरे साथ है. जब गरीब के मन में बात आ जाती है. उसका विश्वास जम जाता है कि देश का प्रधानमंत्री उसके साथ खड़ा है तो उससे खुशी की बात किसी भी राजनीतिक पार्टी के कार्यकर्ता के लिए क्या हो सकती है?

 

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