आतंकी गोलियां बरसाते रहे मैं तेजी से बस चलाता रहा- सलीम

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सोमवार को अनंतनाग में अमरनाथ यात्रियों पर हुए हमले में सात लोगों की मौत हो गई जबकि दो दर्जन से अधिक लोग घायल हुए. इस आतंकी हमले में 45 से अधिक लोगों की जान बस के ड्राइवर ने अपनी बहादुरी से बचाई. इस बस ड्राइवर का नाम सलीम शेख है. सलीम शेख ने अपनी सूझबूझ और बहादुरी से आतंकियों को अपने मंसूबे में कामयाब नहीं होने दिया.

आतंकी हमले के समय बस ड्राइवर ने सूझबूझ दिखाते हुए मौके से बस को किसी तरह भगाकर सुरक्षाबल के कैंप तक पहुंचाया. आंतकी बस पर गोलियां बरसाते रहे. निहत्थे यात्रियों को अपनी गोलियों का निशाना बनाते रहे, जिसमें सात श्रृद्धालुओं की मौत हो गई. लेकिन इस बस ड्राइवर ने हार नहीं मानी और बस को नीचे झुककर दौड़ाता रहा. और आखिरकार 50 से ज्यादा यात्रियों की जान बचा दी. इस हादसे के बाद शेख कहते है कि अगर उन्हें मौका मिला तो वह दोबारा अमरनाथ यात्रा पर जाएंगे. मैंने उस दिन सिर्फ अपना कर्तव्य निभाया.

जब आतंकी बस को निशाना बना रहे थे गोलियां बरसा रहे थे तब शेख बहादुरी और स्थिर मन से बस को 1.5 किलोमीटर तक दौड़ाते रहे और आखिरकार आर्मी कैेंप पर बस को ले गए. शेख ने अपने एक इंटरव्यू में बताया कि वह बस को इसलिए नहीं रोकना चाहते थे क्योंकि अगर वह ऐसा करते तो आतंकी बस में चढ़ जाते और यात्रियों को निशाना बनाते. एक आतंकी तो बस में चढ़ने की कोशिश भी कर रहा था लेकिन बस में बैठे एक यात्री ने उसे धक्का देकर बस से नीचे फेंक दिया.

सलीम शेख की पत्नी ने भी मीडिया से बातचीत की और कहा, “मेरे पति ने अनेक अमरनाथ श्रद्धालुओं की जान बचाई है, मुझे इस पर गर्व है. भले ही और हमले होते रहें, मैं तब भी उन्हें अमरनाथ, यात्रियों के साथ भेजूंगी.” सलीम के पिता ने भी कहा कि उन्हें अपने बेटे पर गर्व है. उन्होंने कहा, “भारत में हिंदू-मुस्लिम सद्भाव से रहते हैं. एक-दूसरे की मदद के लिए तत्पर रहते हैं. वह गद्दार हैं जो धर्म-संप्रदाय और कौम के नाम पर दोनों समुदायों को बांटना चाहते हैं, दरार पैदा करने की कोशिश करते हैं.”

आपको बता दे, सलीम का परिवार महाराष्ट्र के पीपलखेड़ा का रहने वाला है. सलीम की बहादुरी को पूरे देश में सलाम किया जा रहा है. वहीं सोशल मीडिया पर सलीम एक हीरो बन गए है. और हर कोई सलीम को सलाम कर रहा है.

जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले में हुए आतंकी हमले के बाद देश के खिलाड़ियों ने इसपर अपनी प्रतिक्रिया भी दी और दुख जताया. पहलवान गीता फोगाट लिखती है, निहत्थो पे गोली बरसा के कौन सी जन्नत जाओगे, तुम इसी धरती पे कुत्तों की तरह मारे जाओंगे. बहुत हो गई अब आतंक की निंदा, जलाना होगा इनको जिंदा.

ओलंपिक मैडलिस्ट योगोश्वर दत्त लिखते है, निर्दोष लोगों की बार बार मौत! अब और बर्दास्त नहीं होगा. ईंट का जवाब पत्थर से और बम का जवाब मिसाइल से यही रास्ता बचा है अब बस.

वहीं वीरेंद्र सहवाग लिखते है, बेटा फौजी होकर शहीद हो तो मां रोती है, मां तीर्थ पर आतंकवादी द्वारा मारी जाएं तो बेटा रोता है. ऐसा इंतजार ईश्वर किसी के हिस्से न दें.

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