आखिर क्यों 10 साल तक अब चुनाव नहीं लड़ सकेंगी शशिकला?

0
172
सुप्रीम कोर्ट ने आज तमिलनाडु में मुख्यमंत्री के लिए दावा पेश कर चुकी शशिकला को चार साल की सजा सुनाई है. सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए हाई कोर्ट के फैसले को पलट दिया. निचली अदालत ने आय से ज्यादा संपत्ति के मामले में शशिकला को चार साल की सजा सुनाई थी लेकिन हाई कोर्ट ने इस फैसले को पलट दिया औऱ शशिकला बरी हो गई. सुप्रीम कोर्ट में इस फैसले को चुनौती दी गई. सुप्रीम कोर्ट ने आखिरकार निचली अदालत के फैसले को सही माना और चार साल की सजा को बरकरार रखा.
 
अब शशिकला सीएम की कुर्सी पर बैठने का सपना नहीं देख पाएंगी. क्योंकि आज ही से वह किसी भी तरह का चुनाव नहीं लड़ सकती. सुप्रीम कोर्ट ने 2013 में एक एतिहासिक फैसला लिया था. जिसके बाद अगर किसी व्यक्ति को दो साल से ज्यादा की सजा हो जाती है तो वह तुरंत चुनाव लड़ने या अगर किसी विधानसभा या संसद का सदस्य है तो अयोग्य करार होगा और सदस्यता चली जाएगी.
 
प्रतिनिधि कानून, 1951 की धारा 8 (4) को सुप्रीम कोर्ट ने लिली थॉमस बनाम संघ और लोक प्रभारी बनाम संघ के मामले में असंवैधानिक घोषित किया था. इस धारा में अगर किसी को सजा हो जाती है तो वह तीन महीने के अंदर अपील कर सकता है और तब तक उसकी सदन की सदस्यता रद्द नहीं होगी ऐसा प्रावधान है. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस धारा को असंवैधानिक माना.
 
प्रतिनिधि कानून, 1951 की धारा 8 (3) के अनुसार यदि किसी को दो साल से ज्यादा की सजा होती है तो सजा खत्म होने के बाद भी वह 6 साल तक चुनाव नहीं लड़ सकता. लालू प्रसाद यादव को चारा घोटाले में निचली अदालत से सजा मिलने के बाद अपनी लोकसभा की सदस्यता को गंवाना पड़ा था. लालू की सदस्यता सुप्रीम कोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले के बाद रद्द हो गई थी.
 
आपको बता दे, इस एतिहासिक फैसले से पहले धारा 8 (4) में तीन महीने के अंदर अपील दायर कर अपील पर फैसला आने तक दोषी सदस्यता से बर्खास्त नहीं होता था.

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY