अमर सिंह के संपर्क-सम्बन्ध की अमरकथा का असली सच !

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मर सिंह का कहना है कि अमिताभ, अंबानी, अखिलेश, आजम और कांग्रेस ने उन्हे धोखा दिया है. यूज और थ्रो की नीति पर चलने वाली कांग्रेस ने उन्हे मदद करने के बावजूद जेल पहुंचा दिया और जिसे अपने बेटे की तरह माना उसी अखिलेश ने उनके साथ सबसे निकृष्ट व्यवहार किया. अमर सिंह के मुताबिक अखिलेश के अहंकार और लकेंशी आचरण ने उसे अब राजनीति का चूहा बना दिया है. अपने संपर्क और सम्बन्ध से सत्ता और सियासत को साधने वाले अमर सिंह से हमने एक खास बातचीत की. अमर सिंह ने अपनी अमर-वाणी में अपने अनुभव का अमर-ज्ञान हमारे साथ बड़ी सहजता, सरलता और स्पष्टता के साथ साझा किया.

अमर सिंह के मुताबिक अमिताभ और अंबानी की हैसियत और हिम्मत उनके सामने आज भी बोलने की नहीं है. वो ना समाजवादी पार्टी में जाएंगे और ना ही जेल भेजने वाली कांग्रेस पार्टी में शामिल होगें. बीजेपी के विकल्प पर उनका कहना है कि पुरुष के भाग्य को कोई नहीं जानता है.

प्रश्न: अमर सिंह का ए नाम वाले अखिलेश, आजम खान, अमिताभ और अंबानी से रिश्ता बनता है लेकिन फिर दूर-पास के बाद दूर ही हो जाता है इसकी क्या वजह है.?

उत्तर: इसकी वजह कुछ नहीं है. पहले आप ये बताइए कि इंदिरा गांधी के सबसे निकट थे सिध्दार्थ शंकर राय ने ही आपात स्थिति लगाई. उन्होने ही लोकसभा का कार्यालय 5 साल से 6 साल कराया. लेकिन सत्ता चली गई तो सबसे ज्यादा विरोधी वहीं हुए और शाह कमीशन में गवाही दी. पूरे के पूरे आपात स्थिति के कार्यकाल में डॉ कर्ण सिंह स्वास्थ्य मंत्री थे. और संजय गांधी के कार्यक्रम नसबंदी के मंत्री थे. उस कार्यकाल में तो वो चुप रहे. उसके बाद चुनाव जब इंदिरा जी हार गई तो भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष पद के चुनाव में उनके ही विरुध्द खड़े हुए. ईश्वरचंद विद्या सागर जी ने कहा है, बंगाल के बड़े दार्शनिक व्यक्ति कि हर उस व्यक्ति के जिसकी तुम ज्यादा मदद कर दो उससे होशियार रहो. क्योंकि ज्यादा मदद तुम करोगे तो वह व्यक्ति तम्हारी मदद का आदी हो जाएगा. और उसकी मदद अगर आपने 100 बार की और 101 बार नहीं कर पाए तो तुम्हारा 100 बार का किया हुआ बेकार हो जाएगा. अगर आप किसी भूखे को एक दिन रोटी खिला देंगे तो वो जीवन भर दुआ देगा. उस दिन की भूख आपने मिटाई लेकिन अगर आप वैभव की ऊंची अट्टालिकाओं मे अट्टाहास करने वाले बड़े लोग.. उनके लोभ और लालच को, उनकी जरुरत को नहीं..हमने जीवन में बहुत से जरुरतमंदो की मदद की उनमें से एक भी मुझे छोड़कर नहीं गया. वो आज भी हमारे भक्त है. वो हमसे मिलते है. ये मेरे अऩुभव को निचोड़ है. 100 लड़कियों की शादी में विंध्याचल में कराता हूं. कहीं मिलती है तो पिताजी आपने कन्यादान किया.

प्रश्न:  मैने जो 4 नाम बताए अखिलेश, आजम खान, अमिताभ और अंबानी उनकी भी मदद आपने की है.?

उत्तर: मदद ही की है.

प्रश्न: सवाल यहीं है कि मदद की तो आपके खिलाफ और आपसे दूर क्यों है.?

उत्तर: इंदिरा जी ने भी मदद की सब भाग गए, इसीलिए अर्जुन दास साइकिल का पंचर बनाने वाला, कमलनाथ कलकतते के व्यवसायी…ये जीवन का प्रसंग है. एक अच्छी पंक्ति है नीरज जी की क्या है करिश्मा कैसा खिलवाड़ है, जानवर आदमी से ज्यादा वफादार है. और आदमी माल जिसका खाता है प्यार जिसका पाता है उसके ही दिल में छुरा घोंपता है.

प्रश्न: कहीं इसकी वजह ये तो नहीं है कि आप मदद करते है. अहसान करते है लेकिन अहसान का बोझ इतना.. मैसेज ये चला जाता है जैसे आप दिखा रहे है, जता रहे है. जैसे अमिताभ बच्चन जी का प्रसंग था वो कर्ज में थे उनकी कोठी की नीलामी की बात आई.?

उत्तर: अब अगर जब डुग्गी पिट रही है. हम जाकर बचाते है तो दिखता है ना.

प्रश्न: लेकिन जब आप कार से 7 करोड़ का चैक, ड्राफ्ट दिखाते कि हम अमिताभ बच्चन की कर्ज की देनदारी का भुगतान करने जा रहे है. वो क्या था ?

उत्तर: वो उनकी अनुमति से दिखाया. छवि खराब हो गई थी कर्जदार है. उनको समाज को बताना था कि हम कर्ज चुका रहे है. जो कैनवास गंदा हो गया था, उस गंदे कैनवास को ड्राइक्लीन करना था. घर के गंदे कपड़े को साफ करना होता है. अमिताभ बच्चन इसीलिए तो नहीं बोलते. वो बोले क्या.? ये तमाम लोग सिवाय अखिलेश के निकृष्ट व्यवहार नहीं किए. इनमे से कौन सा व्यक्ति है जो अमर सिंह के विरुध्द आज भी खड़ा हो सकता है.? ठीक है, वो हमारे जीवन से चले गए लेकिन इतना शर्म का, आंख का पानी है कि वो आज भी मौन रहते है. हम बोलते है तो सुनते है. हमारी बात का जवाब देन की हैसियत, हिम्मत आज भी नहीं है. लेकिन मुख्यमंत्री का पद, सत्ता के अंहकार का क्रूर अट्टाहास, लंकेशी आचरण तमाम चीजो ने अखिलेश को वो बना दिया जो उनको बनना चाहिए. नहीं करना चाहिए था. संत की कहानी है. उन्होने चूहे को बिल्ली से बचाने के लिए बिल्ली बना दिया. कुत्ते से बचाने के लिए बिल्ली को कुत्ता बनाया और कुत्ते को बाघ बना दिया लेकिन जब वो बाघ बनकर संत को ही खाने लगा तो संत ने उसे फिर से चूहा ही बना दिया. यहीं अखिलेश के साथ हुआ. उसके अहंकार ने आडम्बर ने चूहे से शेर बना दिया. कहा अंकल, चाचा, पिता को खाउंगा. लेकिन विधि ने कहा चूहे हो जाओ. वो राजनीति के चूहा हो गए. गठबंधन बनाया जो  असल में महागठबंधन नहीं महाहठबंधन था. बुआ का हाथी ले लो, राहुल का हाथ ले लो और अपनी पंक्चर हुई साइकिल ले लो. ये तीनो मिलकर भी कुछ नहीं कर सकते. कहावत है चूहा मोटा होकर छूछूंदर हो सकता है हाथी नहीं. ये तीनो मिलकर भी मोदी का मुकाबला ना तो तो उत्तर प्रदेश में और ना ही देश में कर सकते है.

प्रश्न: कोई भी रिश्ता दो पक्षो की जिम्मेदारी होती है. मुलायम सिंह ने जेल जाने से बचाने के लिए और अमिताभ ने अपना बंगला बिकने से बचाने के लिए कृतज्ञता तो जताई थी फिर रिश्ते की मिठास कहां चली गई.?

उत्तर: कृतज्ञता जताई लेकिन मौखिक जताई. अमिताभ की अर्धांगिनी ने क्या किया.? मुलायम ने कृतज्ञता जताई लेकिन आजम खान ने क्या किया.? जरा भी स्वाभिमानी है, तो विद्रोह की भावना आएगी ही. पुत्र अखिलेश, रामगोपाल यादव और आजम खान ने क्या किया.? स्वाभाविक रिश्ते में सम्मान की सामूहिकता भी होती है. सामूहिक स्वीकार्यता भी होती है. अन्तर्कलह के अंतर्पुर में आप नहीं रह सकते.”

प्रश्न: आपने नोटबंदी और राष्ट्रवाद का समर्थऩ किया. क्या आप अब मुलायमवादी से मोदीवाद की तरफ बढ़ रहे है.?

उत्तर: नीतीश को क्यो नही कहते आप ? उन्होने भी नोटबंदी का समर्थन किया. हमने तो अपने ड्राइवर से पूछा नोटबंदी कैसी है? उसने कहा नोटबंदी अच्छा है. मुझे लगा कि मेरा ड्राइवर लाइन में लगने को तैयार है लेकिन मोदी जी का विरोध नहीं कर रहा है. राहुल और अखिलेश को नीचे की अच्छाई नहीं दिखती है. मोदी की नोटबंदी से अमीरी और गरीबी में देश बंट गया. गरीबो को लगा अमीरो की दौलत अब छिन जाएगी. बैंको का अडानी, अंबानी जैसे बड़े लोगो को दिया कर्ज डूब गया. बैंक खाली और खोखले हो गए लेकिन नोटबंदी से पैसा बैंको में सिस्टम में आ गया. इस काम के लिए मोदी की निंदा क्यो? अब देखिए सबकुछ सामान्य हो गया.

प्रश्न: उसके लिए तो बड़ी मछली को पकड़ना चाहिए. बजाए आम आदमी, दस्तकार, छोटे कारीगर परेशान हो  गांवो में भी नकदी की जरुरत तो रहती ही है.?

उत्तर:  उन्होने 50 दिन का समय मांगा ठीक है 60 दिन या 70 दिन लग गए. देश का प्रधानमंत्री समय मांग रहा है तो आप नहीं देंगे. उसमें कौन सी दलाली हो गई. फिर तो नीतीश कुमार भी दल्ले है. अब तो पूरा देश ही दल्ला है. सब वोट दे रहे है. हमने तो प्रारम्भिक दौर मे ही नोटबंदी का समर्थन कर दिया. चुनाव नतीजो से पहले ही नोटबंदी का समर्थन किया. मोदी की बयार देखकर तो क्या नहीं. अगर ये हमारा आकलन, हमारी समझ और उसके अनुरुप हमारा बयान है तो ये हमारी सफलता है या विफलता है.?

इंदिरा जी गरीबी हटाओ का नारा देकर बड़ी नेता बन गई. लेकिन इस व्यक्ति (मोदी ) ने तो क्लास डिवाइड कर दी. अमीर और गरीब. अब गरीब ज्यादा है उनका समर्थन मिला और वोट भी मिला. हांडी का एक चावल देखकर पता लगा सकते है. उसी तरह हमने अपने ड्राइवर से पूछा और नोटबंदी का समर्थन किया. हमने तो दूसरो को भी कहा था गलती मत कीजिए. नोटबंदी का समर्थन कीजिए. हमने तो सोनिया गांधी को भी नोटबंदी का समर्थन करने के लिए पत्र लिखा कि बड़े राजनेता इसका समर्थन नहीं करेंगे तो आरोप लगेगा कि इनके पास अकूत धन है वो मिट्टी हो गया इसलिए विरोध किया.

प्रश्न: रोचक स्थिति ये है कि अखिलेश कैंप का आरोप है कि आप बीजेपी के इशारे पर पार्टी तोड़ने आए. शिवपाल बीजेपी का एजेंट रामगोपाल को बताते है. रामगोपाल ने कहा कि शिवपाल बीजेपी से मिले हुए है तो कहीं ना कहीं मोदी और बीजेपी तो  केन्द्र  में आ ही गए. तो कौन कहां है?

उत्तर: देखिए ऐसा है. नोटबंदी का समर्थन नीतीश ने भी किया. हमने भी किया हमने तो कारण बता दिया हमने क्यों किया. अपने ड्राइवर के कहने से किया. मोदी के कहने से नहीं किया. ठीक है ये स्पष्ट कर दूं. दूसरी बात ये है कि हम परिवार तोड़ रहे है तो बबुआ है क्या ये लोग ? हमारी तो रोटी राजनीति नहीं हैं. हम तो सीपीडब्ल्यूडी के मकान में नहीं रहते है. इस मकान से हमें कोई नहीं निकाल सकता और इस मकान में हमारी रिहाइश सत्ता से संबधित नहीं है. इससे अच्छा और इससे बड़ा मकान मुझे और नहीं चाहिए. मैं संतुष्ट हूं. मै तो राजनीति के उपर पराजीवी व्यक्ति नहीं हूं. मैं किसी पार्टी के उपर पराजीवी नहीं हूं. तो हमारे जैसा व्यक्ति वो काम क्यों ना करें.? अपने मन की बात क्यों ना करे.? जिस चीज में हम आश्वस्त हो.

हम दलाल है तो नीतीश भी दलाल है. नीतीश को छोड़ दें लालू. शहाबुद्दीन जो तेजाब में नहलाकर लोगो को मारते है उसके पक्ष में है लालू और उसके विरोध में है नीतीश. अपनी अम्मा का दूध पीएं तो अलग हो जाए नीतीश से. शहाबुद्दीन के साथ मिलकर बनाए और सजा हो गई तो वैसे भी तिहाड़ जाएंगे और शहाबुद्दीन उनका सहयोग करेंगे. तो देखिए ये सब बाते मत करिए कि आप पर आरोप लगाए है. क्या मुलायम सिंह बोले कि हमने उनके पुत्र के विरोध में कभी बोला है. ये तो क्या होता है कि आप अपने पिता को गाली नहीं दे सकते क्योंकि आप ठीक नहीं लगेंगे तो पिता के साथ के लोगो को गाली दो. कोई मंत्री बनता था तो कहा जाता था कि इंदिरा जी ने बना दिया हट जाता था तो कहा जाता था कि इंदिरा जी का दोष नहीं है धवन और फोतेदार ने हटा दिया. ये विधि की परम्परा है. अच्छा होता है तो बड़ा आदमी करता है. बुरा होता है तो उसके निकट का आदमी करता है. वो भी एक तरीका है राजनीति का, कि दरवाजा बंद हुआ है तो रोशनदान खोल कर रखो. क्या पता फिर आना हो, फिर मिलना हो तो कह सके कि साहब हमने आप को तो कुछ नहीं कहा अमर सिंह को कहा है. तो ये मैं बहुत देख चुका हूं राजनीति में.

प्रश्न: अमर सिंह के व्यक्तित्व, ताकत और संपर्क से जुड़ा सवाल है. आप सम्बन्धो को महत्व देते है. आपने सत्ता के समीकरण देखें है. संपर्क और सम्बन्ध का जो आपका हुनर है. आपको ये नहीं लगता है कि आप इसे बजाए बड़े लोगो के आम जनता के लिए इस्तेमाल करे, उसका सदुपयोग करें?

उत्तर: किया तो है. अबकी बार आजमगढ़ गए, जौनपुर गए, गाजीपुर गए, गोरखपुर गए. किसी दल में नहीं थे राष्ट्रवाद और आतंकवाद चुनौतियां इस पर भाषण दिया. समाज की कीचड़ में कौन सा पुष्प खिले, प्रष्टफुटित हो, उसे चिन्हित करके उसे समर्थन दीजिए ये अपील की. किसी दल का, भारतीय जनता पार्टी का नाम तो नहीं लिया.

प्रश्न: आपकी जो महारत है. आपकी जो सूचनाएं है, खुलासे भी करते है. जैसे बीजेपी के सुब्रह्मण्यम स्वामी है. वो कोर्ट में जाकर चैलेंज करते है. आपको नहीं लगता आपकी जो सूचनाएं है, वो आप भी करें तो आपकी जो पुरानी छवि रही है उससे बाहर आने में खासकर उम्र के इस पड़ाव में ज्यादा सार्थक और सदुपयोगी होगा.?

उत्तर: कर ही रहे है. और आरोप लगने की बात ही नहीं क्योंकि आरोप तो उसी पर लगता है जो घोड़ा तेज भागने की क्षमता रखता है कोड़े उसी घोड़े को ज्यादा लगते है. जो घोड़ा भागता ही नहीं है. थका होता है. उसे रेस के मैदान मे कोई ले ही नहीं जाता है. आलोचना तो मोदी की भी हुई उन्हे अमेरिका में वीजा तक नहीं मिला. आलोचना तो मुलायम सिंह की भी हुई कि वो छविराम डाकू के गिरोह के सदस्य थे. वीपी सिंह ने कहा इसका तो एनकाउंटर कर देना चाहिए.

प्रश्न: क्या ये सही बात है.?

उत्तर:  मेरी समझ से तो नहीं है. लेकिन आरोप की बात हम कह रहे है. उदयन शर्मा ने रविवार्ता में छापा. आरोपो से कौन बचा है और कब बचा है. कुछ रीत जगत की ऐसी है, हर सुबह की यहां शाम हुई. कौन है तु क्या नाम है तेरा, सीता भी यहां बदनाम हुई.. फिर क्यों संसार की बातों पर भीग गए तेरे नैना, कुछ तो लोग कहेंगे, लोगो का काम है कहना.

प्रश्न: आप को स्वास्थ्य की समस्या आई. किडनी खराब हुई तो आपने कहा कि पार्टी के लिए ज्यादा काम किया इसीलिए ऐसा हुआ. कैश फोर वोट में आप को जेल भी हुई. जेएमएम केस में भी आपका नाम आया तो क्या अपने जीवन से संतुष्ट है या कोई मलाल है कि ऐसा होता तो वैसा होता?

उत्तर: हम संतुष्ट है और उन तमाम लोगो से संतुष्ट हैं जिन्होने हमें धोखा दिया. जीवन में हमसे लिया किया? दिया ही कुछ, चाहे धोखा ही दिया. धोखा जो होता है वो एक अनुभव होता है. कम से कम तमाम वो लोग जिन्होने धोखा दिया चाहे वो बच्चन हो, गांधी हो उनके दायित्व के भार से तो मैं मुक्त हुआ. हमारा शत्रु भी ये नहीं कहेगा कि उनसे हमने लिया. लोग ये नहीं कहते हे कि हमने बच्चन से कुछ लिया  और ये भी कोई नहीं कहता कि अंबानी से हमने धन लिया. तो हमने लिया और उन्होने दिया. धोखा ही तो दिया. कुछ देकर ही गए. धोखा अनुभव होता है. मानव योनि मूलत अपने स्वार्थ के लिए जीती है. और जब तक आपका स्वार्थ है तब तक आपके साथ हैं, उसके बाद नहीं है. अगर आपके पास जरदारी है. रसूख है तो आप शेर है. चाहे घर में रहे या बाहर. अगर रसूख नहीं है, जरदारी नहीं है तो आप बिल्ली है. चाहे आप अपने घर में रहे या दिल्ली में. ईश्वर की कृपा है कि जरदारी कायम है. मौसम की तरह लोग आते है, जाते है. तो कभी-कभी बीच में पतझड़ भी आता है तो हम अपना जीवन उसी तरह का मानते है.

प्रश्न: इस रसूख को बढ़ाने के लिए आपने कहा कि मैं कांग्रेस में भी जा सकता हूं.?

उत्तर: मैने कभी नहीं कहा.

प्रश्न: आपने एक इंटरव्यू में कहा कि मैं संपर्क में हूं. मेरे कांग्रेस में रिश्ते है. अगर चाहूं तो मैं कांग्रेस में जा सकता हूं.

उत्तर: जा सकता हूं लेकिन मै कांग्रेस में नहीं जाउंगा. कांग्रेस की हमने मदद की. शीला दीक्षित की सरकार यहां थी और मनमोहन सिंह की सरकार वहां थी. मैं समाजवादी पार्टी से निष्कासित था. रेवती रमन सिंह का वीडियो टेप पैसो की बात करते हुए था. वो समाजवादी पार्टी में थे. समाजवादी पार्टी के समर्थन की जरुरत थी. लेकिन मुझे जेल जाना पड़ा. मुझे जेल भेज दिया गया और नीचे सुला दिया गया. एक बाल्टी और मग दे दिया गया कहा प्यास लगे तो पी लेना और शौच लगे तो धो लेना. उस कांग्रेस में मैं क्यों जाउंगा.?

प्रश्न: आप ही ने कहा था कि जब बुरा वक्त था जब आप जेल में थे दो ही लोगो ने आपसे फोन पर बात की एक सोनिया गांधी और दूसरे राजनाथ सिंह.?

उत्तर: वो मैं अब भी बोलता हूं. तो ये कांग्रेस की बात थोड़ी ही है.

प्रश्न: बुरे वक्त में ही तो अपनो की पहचान होती है.?

उत्तर: बुरे वक्त में उन्होने बात की. बात इसलिए भी तो कर सकते है कि गिल्ट हो कि हमारी सरकार बचाई. और हमारे ही लोगो ने अंदर कर दिया. ये सोनिया गांधी की सदाशयता मैं आपको बता रहा हूं. सोनिया गांधी की बुराई मैने आज भी आपसे नहीं किया. मैने कांग्रेस के बारे में जो कहा. कांग्रेस का चाल, चरित्र और चेहरा बड़ा दोगला है. सोनिया गांधी का व्यक्तिगत आचरण..उन्होने चंद्रशेखर की भी बड़ी मदद की. कांग्रेस तो यूज एंड थ्रो के सिध्दांत पर काम करती है. सबके साथ ऐसा ही किया जगजीवनराम के साथ भी ऐसा हुआ. उनके कांग्रेस छोड़ने के बाद ही जेपी आंदोलन में बयार आई. कांग्रेस में कुछ तो बात है जो आज ये रसातल में जा रही है. कांग्रेस ने क्षेत्रीय नेताओं को दबाने का काम किया. कांग्रेस की ताकत उसके बड़े व्यक्तित्व वाले क्षेत्रीय राजनेता थे लेकिन आज के मंत्री तो फुटकर रेजगारी की तरह यत्र, तत्र, सर्वत्र है. ये हाल सब जगह है पत्रकारिता में अब गिरिलाल जैन नहीं है. सिनेमा में भी अब दिलीप कुमार, देवानंद और राजकपूर नहीं है. जब वो स्टार थे तो धरती हिलती थी. नेहरु जी उन्हे बुलाकर तीनमूर्ति में बात करते थे क्योंकि वो अमिताभ बच्चन की तरह चूरण और च्यवनप्राश और सीमेंट नहीं बेचते थे.

प्रश्न: इसीलिए तो भतीजे ने कहा था कि वो गुजरात के गधो का प्रचार ना करें.?

उत्तर: उऩकी पत्नी भतीजे के दल में घूम-घूमकर प्रचार करती है. गुजरात के गधो नहीं गधे का प्रचार ना करें उन्होने सीधे-सीधे मोदी जी को गधा कहा.

प्रश्न: आपके राजनैतिक विकल्प में बीजेपी का रास्ता खुला हुआ है.?

उत्तर: जीवन के जिस पढ़ाव और स्तर पर हम है. हमारे लिए जो रास्ते बंद है वो हम बता सकते है. क्या रास्ते खुले है उसका स्वयं मुझे पता नहीं, स्त्री के चरित्र और पुरुष के भाग्य के बारे में आकलन लगाना बड़ा मुश्किल है.

टीएनआई: अमर सिंह जी आपने हमे समय दिया हमसे बातचीत की धन्यवाद.

अमर सिंह: धन्यवाद

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